16लाख 8000हजार करोङ का अब तक का सबसे बङा घोटाला । मतकर्ताओ गौर कीजिए

अंग्रेज़ 1947 में भारत छोड़कर गए । 1950 में भारत का संविधान बना । संविधान ने भारत के सभी लोगों को एक सामान माना और सभी को लोकतंत्र निर्माण में भागीदारी देते हुए वोट का अधिकार दिया, चाहे वह टाटा बिरला हों, चाहे खेती-किसानी करने वाला या फिर मजदूर।

अंग्रेजों के जमाने में आर्थिक विषमता इसलिए पैदा हुई थी क्योंकि उन्होंने भारत की जनता पर जुल्म करने वाले अपने चमचों को जागीरदार और जमींदार बनाकर जनता की जमीन और धन हड़प कर दे दिया था। अंग्रेजों के जाने के बाद अंग्रेजों के चमचों से जनता की जमीन और धन-दौलत वापस नहीं ली गई। केवल काले व स्वदेशी अंग्रेजों ने गोरे अंग्रेजों की जगह ले ली और भारत की जनता की धन दौलत देश की आजादी के बाद भी सत्ता के कब्जे में रह गई ।

अंग्रेजों के जाने के बाद उनकी बनाई दमनकारी व्यवस्था आज़ादी के बाद भी चलती रही। अब काले अंग्रेज़ जनता की जमीन और धन दौलत पर कुंडली मार कर बैठ गए । होना यह चाहिए था कि अंग्रेजों के जाते ही देश की सारी धन दौलत देश के सारे नागरिकों में बराबर-बराबर बांट दी जाती। यदि ऐसा होता, तो आज अमीरी गरीबी की इतनी बड़ी खाई न होती, किसान आत्महत्या न करते। देश के 70 करोड़ लोग जानवरों की जिंदगी जीने के लिए विवश ना होते।

अंग्रेजों ने देश को आर्थिक गुलामी की राह पर धकेला था अतः 1947 के बाद देश की जनता को आर्थिक आजादी नहीं मिली। मिली तो केवल जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा की राजनीती करने वाले मुट्ठी भर नेताओं के काम आने वाली राजनीतिक आजादी। यह खुलासा संसद में तब हुआ, जब 137 सांसदों ने भरत गांधी के राजनीती सुधार के प्रस्तावों को संसद में पेश किया। तब दुनिया को यह जानकारी हुई कि अगर 1947 के बाद यदि जनता की जमीन और संसाधनों का किराया जनता को देने की व्यवस्था बन जाती, तो कई हजार रुपए हर परिवार को मिल रहे होते । लेकिन यह व्यवस्था नहीं बन पायी।

1947 से अगर वर्तमान तक पूरी राशि को अगर जोड़ा जाये, तो आज यह रकम लगभग 16 लाख, 8000 करोड़ रुपए बनती है। यह घोटाला जानबूझकर चलता रहा, क्योंकि अंग्रेजों के जमाने में आम जनता की जगह जमीन और धन दौलत कब्जा करने वाले लोगों ने चंदा देकर राज करने वाली पार्टियों के नेताओं का मुंह बंद रखा।

अब राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक व समकालीन राजनीति सुधारक श्री भरत गांधी ने जनता को आर्थिक आजादी दिलाने के लिए आंदोलन छेड़ा है। आम जनता की धन दौलत, जमीन और संसाधनों पर से कब्जाधारियों से कब्जा छुड़ाने के लिए नयी पार्टी बनाई गयी है, जिसका नाम है- वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल। 70 साल से जिस अधिकार को दबा कर रखा गया था, वह अधिकार जनता को वापस दिलाने के लिए यह पार्टी चुनाव के मैदान में आ गई है और बाकी पार्टियों के कान खड़े हो गए हैं।

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