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प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक 17/11/2018

यूरोपीयन राष्ट्रवाद लोगों के लिए गले का हार नहीं, फांसी का फंदा है- भरत गांधी

एशियाई वतन की सरकार और वोटरशिप कानून की मांग पर 50,000 से ज्यादा लोगों ने प्रदर्शन किया

अपने स्थापना दिवस के अवसर पर वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल ने रंगिया (कामरूप) में किया जोरदार प्रदर्शन
राज व्यवस्था और अर्थव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने की मांग को लेकर वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल ने रंगिया में जोरदार प्रदर्शन किया है। जिसमें 50,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए। पार्टी के संस्थापक और नीति निर्देशक भरत गांधी ने लोगों से वोटरशिप कानून और एशियाई वतन की सरकार के लिए समर्थन मांगा। लोगों ने हाथ उठाकर ध्वनिमत से समर्थन किया। यह प्रदर्शन पार्टी ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किया था। पार्टी प्रत्येक वर्ष 17 नवंबर को विश्व दर्शन दिवस मनाने के लिए इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करती है। गत वर्ष यह कार्यक्रम नई दिल्ली में हुआ था।
राजनीतिक और आर्थिक सुधारों पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक भरत गांधी ने लोगों को संबोधित करते हुए अपील किया कि भारत का राष्ट्रवाद कभी भी सीमाओं में बंधा नहीं रहा, बल्कि वसुधा को कुटुंब मानने की परंपरा रही। लेकिन यूरोपीय राष्ट्रवाद के कारण देश की जनता आर्थिक रूप से गुलाम हो गई है क्योंकि सस्ते निर्यात के लिए अपने ही देश की सरकार अपने ही देश के गरीबों और मध्यवर्ग को जानबूझकर आर्थिक तंगी में कैद किए हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अनाज, कपड़े, दवाइयां सड़ा रही हैं लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी नागरिकों को नहीं दे रही हैं। जाने-माने राजनीति सुधारक ने हर वोटर को हर महीने फ्री में रु. 6000 उसके बैंक खाते में सरकार द्वारा दिए जाने के लिए कानून बनाने की मांग की। फ्री में इस पैसे के वितरण के औचित्य को बताते हुए कहा कहा कि कंप्यूटर ने पढ़े लिखे लोगों का काम खत्म कर दिया और जेसीबी, बुलडोजर और ट्रैक्टर ने अनपढ़ लोगों का काम खत्म कर दिया है। इसलिए अब मशीनों के परिश्रम से पैदा हुआ धन देश के वोटरों में बांटने के लिए वोटरशिप कानून बनेगा तभी परिवारों की आर्थिक तंगी जाएगी और तभी देश का वास्तविक विकास होगा। उन्होंने कहा कि यूरोपियन यूनियन के तर्ज पर अगर एशियाई देश एक यूनियन बना लेते हैं तो वोटरशिप की रकम रु. 6000 से बढ़कर कम से कम रु. 10000 हो जाएगी। क्योंकि साझी प्रतिरक्षा प्रणाली अपना लेने से कम पैसे में अधिक सुरक्षा हो सकती है। बचा हुआ पैसा वोटर शिप की रकम जोड़ कर वोटरों के बैंक खाते में भेजा जा सकता है। उन्होंने पंचायत चुनाव में और आने वाले लोकसभा चुनाव में वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रत्याशियों को जिता कर देश में व्यवस्था परिवर्तन का जनादेश देने की अपील की।


पार्टी की अखिल भारतीय कमेटी के अध्यक्ष पूर्व सांसद ब्रह्म देव आनंद पासवान ने कहा कि पुराने विचार और पुराने विचारक, आज के समय में अप्रासंगिक हो गए हैं। इसलिए देश को अब नए विचार, नए विचारक, नया नेतृत्व, नई पार्टी और नई राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था चाहिए। उन्होंने कहा कि यह काम करने में वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल पूरी तरह से सक्षम है।
प्रदेश अध्यक्ष ललित पेगू ने वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल से लोगों को जुड़ने की अपील की और कहा कि असम को विकास और शांति के रास्ते पर यही पार्टी ले जा सकती है। पार्टी की स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी की अखिल भारतीय कमेटी और असम प्रदेश कमेटी के कई पदाधिकारियों ने जनसमूह को संबोधित किया। पार्टी की केंद्रीय कमेटी के अध्यक्ष श्री विजय कुमार जैन ने सभा की अध्यक्षता की और सभा का संचालन शाहजहां शेख ने किया।

ललित पेगू
प्रदेश अध्यक्ष
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल
हेल्पलाइन 9696 123456
प्रधानमंत्री कार्यालय को दिये गये ज्ञापन को डाउनलोड करने के लिए http://www.votersparty.in/documents/ पर विजिट करें

Press release

Date: 15th November 2018
Change in system needed, not only change of politicians and party- Bharat Gandhi

The politico-economic problems of the general public cannot be eliminated only by changing the politicians and party. The change in polity and politics of the country and world is the need of hour. These remarks were made by the contemporary political philosopher Bharat Gandhi while addressing the media persons in Guwahati Press Club. He added that today the need of new political party is emerged not only to replace ruling party but to replace the present politico-economic order.
He informed the media persons that the new political party namely Voters Party International(VPI) has come before the public of Assam with blueprint of new politico-economic order. He observed that the state like Assam which is very far from the mainstream of development of the country and world, need a political alternate who could be able to use new modus operandi to solve the long lasting problems of the general public of the Assam. Focusing on the economic problems of the Assam he stated that the financial crisis is the main problem of inhabitants of the Assam which only could be solved by making a law to distribute the money produced by the labour of machines, by natural resources and by existence of various laws.
The founder of Voters Party International said that this very bill is to distribute the rent of collective properties of the country and the world is called as ‘Votership Bill’. Explaining the calculations of rent of the collective property Shri Gandhi stated that if the proposal of votership right gets translated into law, then minimum 6000 rupees could be given to each and every voter of the Assam. He added that this amount may be increased up to more than 10000 and if government of Homeland of the South Asia region including the countries like India, Pakistan, Nepal, Bhutan, Bangladesh, Burma and Maldives will be formed by competent International treaty on the lines of Europian union. Referring the unification of European countries, the author of more than two dozen books written on reforms of political system, Sh. Gandhi said that the Europe throw away the traditional concept of the nationalism, sovereignty and citizenship etc. looking its side-effects and reactions. The modern definitions of all these fundamentals of political science were invented by the European thinkers itself. Sh. Gandhi added that after the experiencing the undesired need of maintaining the economic slavery in the country just for the need of cheap export. The countries of Europe formed the collective governing and defense system. He added that what was thrown away by the European countries in dustbin, is still remaining a a fashion to pick up the expired concept of nationalism, sovereignty and citizenship from the dustbin and engulf the same treating the garbage as medicine in our Homeland countries. Sh. Gandhi said that due to this thinking of wrong direction the scope of bloodshed in the territory of Assam is rising once again. He said that the intellectuals of Assam must stop this development going in violent direction. Sh. Gandhi said that VPI has accepted the challenge to stop the violence spread prosperity and maintain peace in the state, that is why all the sections of society of a Assam must support this Party.

Policy Director of VPI informed that the this party celebrates every year its Foundation Day on 17th November on the United Nations World Philosophy Day. He informed that this year a massive demonstration is scheduled on the eve of foundation day. This demonstration will take place at the district playground situated at Rangia town of Kamrup district of Assam, where more than 1 lac VPI workers are expected to participate.
On this day, the protesters will demand to form the Government of Homeland of South Asian Region. So that the obstacles laying against the bill of Votership could be wiped out and the amount of votership could be increased. He informed that on this occasion a memorandum will be handed over to the Government of India and the same will be sent to the head of nation states of South Asian countries through their high commissioners appointed in India. Shri B A Paswan, the president of all India committee of Voters Party International and Sri Lalit Pegu, the president of Assam state of the party were also present at the occasion.
Yours Sincerely

Lalit Pegu,
The State president of Voters Party International (VPI)
Office- 9696 123456

प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक 15/11/2018

नेता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन वाली पार्टी चाहिए- भरत गांधी

गुवाहाटी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल (VPI) के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी. साथ में VPI के अखिल भारतीय अध्यक्ष पूर्व सांसद श्री ए. बी. पासवान और असम प्रदेश कमिटी के अध्यक्ष ललित पेगू भी मौजूद रहे.

प्रेस क्लब गुवाहाटी में संवाददाताओं के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के संस्थापक और नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने कहा है कि जनता की समस्याएं अब नेता बदलने से हल नहीं हो सकतीं। अब जनता को व्यवस्था बदलने वाली पार्टी चाहिए। उन्होंने कहा कि वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल ऐसी ही एक पार्टी है जो राज व्यवस्था और अर्थव्यवस्था का एक ब्लूप्रिंट लेकर आई है। उन्होंने कहा कि असम जैसा प्रदेश, जो विकास की मुख्यधारा से बहुत दूर है, उसको एक ऐसा राजनीतिक विकल्प चाहिए, जो परंपरागत मुद्दों से अलग हटकर यहां की जमीनी जरूरतों और समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हो। श्री भरत गांधी ने कहा कि पैसे की तंगी असम के नागरिकों की सबसे बड़ी समस्या है और इस समस्या का समाधान तभी हो सकता है, जब मशीनों के परिश्रम से, प्राकृतिक संसाधनों से और कानूनों की मौजूदगी के कारण पैदा हो रहे धन का वितरण प्रत्येक वोटर में करने के लिए कानून बने। उन्होंने कहा कि पार्टी में इस कानून को वोटरशिप कानून कहा जाता है। अगर यह कानून बना तो असम के प्रत्येक नागरिक को हर महीने कम से कम 6000 रुपये मिल सकते हैं और अगर भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बर्मा आदि पड़ोसी देशों की यूरोपियन यूनियन की तर्ज पर एक यूनियन बन जाए और साझी प्रतिरक्षा प्रणाली अपना ली जाए, तो यह रकम बढ़ कर 10000 से ऊपर चली जाएगी। उन्होंने कहा कि परंपरागत राष्ट्रवाद, नागरिकता और संप्रभुता के सिद्धांतों को यूरोप ने खोजा था। लेकिन उसी यूरोप ने आज उन सिद्धांतों को खतरनाक समझ कर कचरे के डब्बे में डाल दिया। इसी का परिणाम है कि 27 देशों ने अपना एक साझा शासन-प्रशासन बना लिया। श्री भरत गांधी ने कहा कि यूरोप ने जिस दवा को खतरनाक समझ कर छोड़ दिया, असम में उसी दवा को कचरे के डिब्बे से उठाकर लोगों को खिलाने की कोशिश की जा रही है और असम इसी गलत चिंतन के कारण एक बार फिर खून खराबे की तरफ बढ़ रहा है, जिसको हर हालत में रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह काम नए विचारों पर आधारित वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल ही कर सकती है। इसलिए हर वर्ग को इस पार्टी का साथ देना चाहिए।
भरत गांधी ने कहा कि पार्टी अपना स्थापना दिवस संयुक्त राष्ट्र संघ के विश्व दर्शन दिवस के दिन 17 नवंबर को हर साल मनाती है। इस साल यह समारोह असम के कामरूप जिले के रंगिया कस्बे में आयोजित किया जा रहा है जिसमें 100000 से अधिक पार्टी कार्यकर्ता शामिल होंगे। इस प्रदर्शन के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ता यूरोपियन यूनियन की तर्ज पर दक्षिण एशियाई वतन की सरकार बनाने की मांग करेंगे, जिससे वोटरशिप के प्रस्तावित कानून के सामने मौजूद बाधाओं को हटाया जा सके और इस रकम को बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस आशय का एक ज्ञापन भारत सहित सभी दक्षिण एशियाई देशों के राष्ट्रपतियों को दिया जाएगा।
इस मौके पर पार्टी के अखिल भारतीय कमेटी के अध्यक्ष पूर्व सांसद श्री ब्रह्मदेव आनंद पासवान और असम प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष ललित पेगू भी मौजूद थे।

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के स्थापना दिवस और संयुक्त राष्ट्र विश्व दर्शन दिवस के अवसर पर होगा यह ऐतिहासिक कार्यक्रम

कार्यक्रम आयोजन समिति की बैठक

रंगिया 10 नवम्बर : वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल का स्थापना दिवस समारोह रंगिया में ही मनाया जाना तय हुआ है. यह कार्यक्रम 17 नवम्बर शनिवार को होगा. इस वर्ष के समारोह का मुख्य विषय होगा ‘दक्षिण एशियाई वतन की सरकार बनाओ, वोटरशिप की रकम बढाओ’. कार्यक्रम आयोजन स्थल और विषय को लेकर रंगिया में आयोजन समिति की बैठक हुई. बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया. असम प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष ललित पेगू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी मीडिया को दी है.

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल हर साल संयुक्त राष्ट्र विश्व दर्शन दिवस 17 नवम्बर को अपना स्थापना दिवस मनाती है और हर साल अलग-अलग विषयों पर जोर दिया जाता है. पार्टी ने तय किया है कि इस साल पार्टी का जोर यूरोपियन यूनियन की तर्ज पर दक्षिण एशियाई वतन की सरकार की मांग पर होगा. इस मौके पर पार्टी विधिवत भारत के राष्ट्रपति को संबोधित इस आशय का ज्ञापन भी प्रस्तुत करेगी और दक्षिण एशियाई देशों के राजपूतों के समक्ष इस ज्ञापन की प्रति को प्रस्तुत करेगी.

ललित पेगू ने कहा कि पार्टी के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने हमारे जैसे कार्यकर्ताओं को विधिवत प्रशिक्षित किया है कि एशिया के देशों के लोग भूख से मर रहे हैं और ये देश मूछों की लड़ाई में अपने अपने देश के 90% लोगों की रोटी कपड़ा मकान दवाई शिक्षा और चिकित्सा का पैसा छीन कर हथियारों की होड़ में लगे हैं. अगर दक्षिण एशियाई देशों की साझी सरकार बन जाये तो सभी देशों में युद्ध की स्थिति ख़त्म हो जाएगी और जो पैसा हथियारों की खरीद में लगता है, उसको पार्टी द्वारा प्रस्तावित वोटरशिप की रकम में जोड़ दिया जायेगा.

पार्टी की नीति बताते हुए वीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रवाद, संप्रभुता और नागरिकता के पुराने सिद्धांत अब अप्रासंगिक हो चुके हैं. क्योंकि आधुनिक राज्य, आधुनिक नागरिकता और संप्रभुता के वर्तमान सिद्धांतों के जन्मदाता यूरोप के विद्वान् हैं. बाद में यूरोप ने राष्ट्रवाद को एक खतरनाक दवा के रूप में पहचाना। इसीलिए राष्ट्रवाद, संप्रभुता और नागरिकता के अपने ही बनाये सिद्धांत को कचरे की पेटी में डाल दिया और यूरोप के 27 देशों ने अपनी साझी नागरिकता, साझी मुद्रा और साझी प्रभुसत्ता का सिद्धांत अपना लिया और अपना साझा शासन-प्रशासन बना लिया.

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यूरोप ने नकली राष्ट्रवाद की जिस दवा को एक्सपायर समझकर कचरे में डाल दिया, आज हम उसी दवा को कचरे की पेटी में से निकलकर गर्म पानी से खाने के लिए लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि असम में एनआरसी की लड़ाई इसलिए छिड़ी है. उन्होंने कहा कि इसीलिए पार्टी ने इस साल अपने स्थापना दिवस समारोह का मुख्य मुद्दा बनाया है- ‘दक्षिण एशियाई वतन की सरकार बनाओ और वोटरशिप की रकम बढाओ.’

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देशों के बीच निर्यात की मजबूरी ख़त्म हो जाये, तो दूसरे देशों में सस्ता सामान बेचने के लिए अपने देश के 100 में से 80 लोगों को पैसे की तंगी के पिंजरे में कैद रखने की जरूरत भी ख़त्म हो जाएगी. उन्होंने कहा कि यूरोप की तरह साझी प्रतिरक्षा और नागरिकता प्रणाली अपना लेने से असम में एनआरसी की समस्या ख़त्म हो जाएगी और हथियारों में खर्च हो रहा पैसा वोटरशिप की रकम में जुड़ जायेगा. ऐसा होने से सरकार हर वोटर को हर महीना सरकारी खजाने से केवल छह हज़ार नहीं, बल्कि दस हज़ार रुपये बड़े आराम से दे सकती है.
भवदीय
ललित पेगू
प्रदेश अध्यक्ष
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल
9696 123456

दक्षिण एशियाई वतन के देशों की साझा सरकार बनाने के लिए 17 नवंबर को रंगिया में हो रहे प्रदर्शन को ऐतिहासिक बनाने की अपील

दरंग जिले के भकतपाड़ा में वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल की एक विशाल रैली हुई। रैली को संबोधित करते हुए पार्टी के मुखिया भरत गांधी  ने कहा कि मंगलदेई लोकसभा सीट से कांग्रेस को अपना दावा छोड़ देना चाहिए और यह सीट वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल को दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब  यह सीट कांग्रेस  कभी जीतती ही नहीं, तो यहां अपना प्रत्याशी खड़ा करके  वोटरों की पार्टी को  कमजोर क्यों करना चाहती है?
 श्री गांधी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जिस तरह भारतीय संस्कृति पर हमला कर रही है और देश की जनता की गाढ़ी कमाई अंबानी अदानी जैसे खरबपतियों के खजाने में डाल रही है, इससे साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी हिंदुओं की पार्टी नहीं है और यह राष्ट्रवादियों की भी पार्टी नहीं है।
 बदरुद्दीन अजमल पर टिप्पणी करते हुए वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के नीति निर्देशक भरत गांधी ने कहा कि असम में आज भारतीय जनता पार्टी का राज बदरुद्दीन अजमल की बदौलत है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने यदि अजमल के विश्वासघात से सबक न सीखा और उनकी पार्टी को असम में पूरी तरह से खत्म न कर दिया तो असम में मुसलमानों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
 एनआरसी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भौगोलिक सीमाओं की रस्सी से कसा राष्ट्रवाद अब पुराने जमाने की चीज हो गया है। उन्होंने कहा कि जिस राष्ट्रवाद को यूरोप ने छोड़ दिया उस राष्ट्रवाद के नाम पर भारत और इसके पड़ोसी देशों के गरीबों और मध्य वर्ग के लोगों को आपस में मरना कटना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि यूरोपियन यूनियन की तर्ज पर भारत और पड़ोसी देशों की तत्काल एक साझी सरकार बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि  दक्षिण एशियाई वतन की सरकार बनाने के लिए आगामी 17 नवंबर को रंगिया में वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल एक लाख से ज्यादा लोगों का प्रदर्शन करेगी।
रैली में बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष ललित पेगू ने कहा की वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल में सभी सामाजिक संगठनों का स्वागत है। उन्होंने पूरे प्रदेश के लोगों से अपील किया कि 17 नवंबर को रंगिया में होने वाली रैली को ऐतिहासिक बनाएं। उन्होंने कहा कि इसी रैली से  एनआरसी, डी वोटर और असम की गरीबी और पिछड़ेपन की समस्या खत्म करने का रास्ता निकलेगा। रैली को रंजय बासूमतारी, जिलाध्यक्ष अबुल कलाम आजाद, अबू शमा जितेंद्र सरकार, अरविंद शर्मा खरगेश्वर डांगियारी, विपुल नर्जरी आदि लोगों ने संबोधित किया। इसके पहले श्री गांधी के स्वागत में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
भवदीयदरंग में वोटरशिप अधिकार रैली में विशाल संख्या में आये पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी
ललित पेगू
प्रदेश अध्यक्ष
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल

सम्मलेन को संबोधित करते वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रदेश अध्यक्ष ललित पेगू

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल ने रंगिया में आयोजित अपने जिला कमेटियों के सम्मेलन में यह प्रस्ताव पारित किया है कि यदि एनआरसी प्रकाशन के बाद कथित विदेशी लोगों को सरकार ने गिरफ्तार किया और असम की जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे से उन लोगों को डिटेंशन कैंप में या जेल में रखकर खिलाने पिलाने का इंतजाम किया, तो वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री ललित पेगू ने सभी जिला कमेटियों को आदेशित किया है कि ब्लॉक स्तर पर आंदोलन के लिए आंदोलन कमेटियों का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि हालांकि केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने समाचार पत्रों के माध्यम से असम की जनता को यह आश्वस्त किया है कि कथित रूप से विदेशी लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा और उनको अपनी सफाई देने के लिए पूरा मौका दिया जाएगा लेकिन इसके बावजूद भी पार्टी के कार्यकर्ता केवल बयान पर विश्वास नहीं करेंगे बल्कि वह जमीनी हकीकत पर नजर रखेंगे। पार्टी के प्रादेशिक महासचिव श्री विपुल नर्ज़री ने जिला कमेटियों को निर्देशित करते हुए कहा कि एनआरसी प्रकाशन के बाद यदि एक भी गिरफ्तारी कहीं भी होती है, तो तत्काल उसकी सूचना वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रादेशिक कार्यालय के हेल्पलाइन 96961 23456 पर दी जाए।
पार्टी के प्रादेशिक कोषाध्यक्ष श्री खरगेश्वर डंगियारी ने आगामी पंचायत चुनाव के मद्देनजर जिला कमेटियों को तैयार रहने को कहा। उन्होंने कहा कि पार्टी किसी भी अन्य दल के साथ गठबंधन बिना किए पंचायत चुनाव लड़ेगी और ज्यादातर सीटों पर अपनी जीत दर्ज करके अपने विचारों के प्रति शासन-प्रशासन, मीडिया और बुद्धिजीवियों का ध्यानाकर्षण करेगी।
श्री तरणी बसुमतारी ने प्रस्ताव रखा कि पार्टी का स्थापना दिवस पिछले साल दिल्ली में बनाया गया था। लेकिन इस बार 17 नवंबर को उदलगुड़ी जिले में मनाया जाए। उन्होंने कहा कि असामाजिक तत्व रेल बंद करेंगे और रोड बंद करेंगे। इस बार उनको माकूल जवाब देने के लिए पूरी तैयार रहना होगा। श्री तरणी बसुमतारी का प्रस्ताव ध्वनिमत से स्वीकार हो गया।
धेमाजी के जिलाध्यक्ष ने मांग की कि पार्टी का अगला कैडर ट्रेनिंग 1 अक्टूबर से 4 अक्टूबर तक उनके जिले में रखा जाए और पार्टी के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी को निमंत्रित किया जाए। उनकी इस मांग को प्रदेश कमेटी ने स्वीकृति दी साथ ही प्रदेश कमेटी ने जिला कमेटी के पदाधिकारियों को यह भी सूचना दी कि पार्टी की कैडर ट्रेनिंग धेमाजी के बाद बारपेटा जिला में भी आयोजित की जाएगी। अंत में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ललित पेगू ने जनपद स्तर के पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि एनआरसी के बारे में लखनऊ में 1 दिन पूर्व पार्टी के अखिल भारतीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव को अक्षरशः लागू करें।

दारुल सफा लखनऊ में पदाधिकारियों को संबोधित करते वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के नीति निर्देशक श्री भरत गाँधी

लखनऊ : नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) की सूची जारी करने के साथ ही आगामी 30 जुलाई को असम के लाखों लोगों को “विदेशी“ घोषित कर दिया जाएगा। किंतु प्रशासनिक निकम्मेपन और कागजातों के हर साल आने वाली विकराल बाढ़ के पानी में बह जाने के कारण बड़े पैमाने पर अपने देश के लोगों को भी विदेशी घोषित कर दिया जाएगा। लेकिन बांग्लादेश या कोई अन्य देश इन नागरिकों को अपनाने के लिए तैयार नहीं है। ऐसी स्थिति में नए रोहिंग्या कांड का खतरा पैदा हो गया है।
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल लखनऊ में संपन्न अपने अखिल भारतीय अधिवेशन में 25 सूत्रीय प्रस्ताव पारित करते हुए सरकार से मांग की है कि बांग्लादेश के साथ अंतर्राष्ट्रीय संधि होने तक विदेशी घोषित किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार ना किया जाए। प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए पार्टी के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने कहा कि एनआरसी के बाद यदि विदेशी घोषित लोगों को गिरफ्तार किया जाता ह,ै तो जेल में और डिटेंशन कैंप में उनके खाने पीने, कपड़े दवाई का खर्च देश की जनता पर थोप दिया जाएगा, जो किसी भी हिसाब से उचित नहीं है।
पार्टी ने अपने प्रस्ताव में यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों के आपराधिक कृत्य के आधार पर तैयार की गई सुरक्षा जांच रिपोर्ट के कारण लगातार पार्टी के प्रमुख श्री भरत गांधी को उत्तर प्रदेश में पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा रही है, जबकि सुरक्षा देने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग कई बार आदेश जारी कर चुके हैं। प्रस्ताव में भरत गांधी को तत्काल पुलिस सुरक्षा मंजूर किए जाने की मांग की गई है। आवारा जानवरों के कारण उत्तर प्रदेश के किसानों का हो रहा भारी नुकसान प्रस्ताव का प्रमुख मुद्दा है। निर्यात की मजबूरी में देश में कृत्रिम रूप से बनाकर रखी गई गरीबी और बेरोजगारी को खत्म करने के लिए पार्टी द्वारा पारित प्रस्ताव में गैट के तर्ज पर एक नई अंतर्राष्ट्रीय संधि के लिए भारत सरकार के अधीन एक नया मंत्रालय बनाने की मांग की गई है। बेरोजगारी को देखते हुए सामाजिक काम करने वालों के काम को भुगतान योग्य कार्य माना जाए और उनको भुगतान देने की मांग की गई है। अधिवेशन का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव विकास में प्रत्येक नागरिक को भागीदारी देने के बारे में है। इस प्रस्ताव में कहा गया है की मशीनों के परिश्रम, प्राकृतिक संसाधनों और राज्य की मशीनरी के कारण हर महीना पैदा हो रहे अरबों रुपये में देश के वोटरों का हिस्सा उनके निजी बैंक खातों तक पहुंचाने के लिए वोटरशिप कानून बनाया जाए। प्रदेश सरकार इस कानून का प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार को तत्काल भेजे। प्रस्ताव में मांग किया गयी है कि वोटरशिप कानून बनाकर वोटर के खाते में ₹6000 हर महीने भेजा जाए। भारत के लगभग सभी पार्टियों के 137 सांसदों ने वोटरों को देश के खजाने से वोटरों को उनका हिस्सा नकद रकम देने का प्रस्ताव चौदहवीं लोकसभा में प्रस्तुत किया था।
सम्मेलन की अध्यक्षता पार्टी की अखिल भारतीय कमेटी के अध्यक्ष और राज्यसभा के पूर्व सांसद श्री ब्रहमदेव आनन्द पासवान ने की। पार्टी प्रमुख श्री भरत गांधी ने देश भर से आए हुए प्रतिनिधियों को पार्टियों के नीतियों और पार्टी के अनोखे संविधान के संबंध में प्रशिक्षित किया। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश की कमेटी घोषित की गई जिसमें मैनपुरी के सादेश अली मशीह को उपाध्यक्ष और सुरेंद्र कुमार वर्मा को पार्टी का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। अधिवेशन में दारुल सफा का ए ब्लॉक का सभागार पूरी तरह खचाखच भरा था।
भवदीय

सुरेंद्र कुमार वर्मा
प्रदेश अध्यक्ष- वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल
पार्टी हैल्पलाइन : 9696 12 34 56
फोन नंबर : 9838735613

वोटरशिप कानून से ₹6000 महीने हर वोटर को मिले तो जाएगी गरीबी- भरत गांधी

गुमला, झारखंड : गुमला में एक सभा को संबोधित करते हुए  वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रमुख  श्री भरत गांधी ने कहा कि कंप्यूटर शिक्षित लोगों का काम  खा गया और अनपढ़ लोगों का काम खत्म कर दिया है जेसीबी मशीनों, ट्रैक्टरों और बड़े-बड़े कल-कारखानों में लगी ऑटोमेटिक मशीनों ने। मशीनों को रोकना संभव नहीं है। लेकिन मशीनों की कमाई देश के लोगों में बांटना संभव है।
मशीनों के कारण पैदा हो रही बेरोजगारी  की तरफ से लोगों का ध्यान खींचते हुए समकालीन राजनीति सुधारक और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने कहा  कि मशीनों की मेहनत से पैदा हुआ धन फ्री का धन है। समंदर के पानी में और जंगलों की लकड़ियों और फलों से तथा जमीन के अंदर मौजूद खनिज पदार्थ से हर महीना पैदा हो रहा खरबों रुपए फ्री का पैसा है, जिसे प्रकृति ने फ्री में दिया। इसी प्रकार तमाम कानूनों का फायदा उठाकर कुछ लोग अरबों रुपए हर महीना कमाते हैं। यह भी उनकी मेहनत का नहीं है, अपितु  कानून के कारण पैदा हुआ फ्री का धन है। यह जो तीन तरह के फ्री का पैसा है, यह कानून बनाने वाले वोटरों के बैंक खाते में हर महीना फ्री देने का कानून क्यों ना बनाया जाए?* वोटरों को मिलने वाले इसी प्रस्तावित पैसे को वोटरशिप कहा जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी इस खोज को संसद में सैकड़ों सांसदों ने पेश किया। संसद की कमेटी ने इसको मंजूर हुई कर लिया। लेकिन बात को दबा दिया गया। श्री गांधी ने कहा कि अगर वोटरशिप का कानून बन जाता तो वोटर के बैंक खाते में रू.5896 हर महीना मिलता। घर में चार वोटर हैं तो लगभग 24 हजार रुपए आता। फिर न कोई बहुत अमीर होता है, ना बहुत गरीब होता।
पार्टी के अखिल भारतीय अध्यक्ष पूर्व सांसद बी ए पास पासवान ने कहा कि धरती के अंदर फ्री में पैदा हो रहे कोयला, लोहा, सोना, चांदी, डीजल, पेट्रोल और इसी तरह  पानी के अंदर व जंगलों में फ्री में पैदा हो रही चीजों से  हर महीने  सरकार खरबों रुपए छापती है, जिसको खरबपति लोग हड़प लेते हैं। फ्री में पैदा होने वाले इस पैसे को  फ्री में वोटरों के खाते में बांटे जाने का कानून बने। उन्होंने कहा कि वोटरों को विकास में भागीदारी देने के लिए वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल  संघर्ष कर रही है।
पूर्व सांसद श्री सूरज मंडल ने वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गरीबी देश की बड़ी समस्या है और विकास का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है इसलिए वोटरशिप जैसा उपाय कारगर साबित हो सकता है उन्होंने आम जनता से अपील की कि इस मुद्दे पर वह अपने जाति धर्म के आग्रह से ऊपर उठकर एकजुट होंं और अपना अधिकार हासिल करें।
सभा में मौजूद लोगों को  श्रीमती पूनम सिंह, शम्भू दत्त मिश्रा, अकबर बादिक, महेश दान, बीरेंद्र माहिल, ललित ओरांव ने भी संबोधित किया। पार्टी के केंद्रीय कमेटी से  श्री वैज्ञानिक स्वामी (लज्जाराम वर्मा) भी मौजूद थे। सभा का आयोजन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रदेव सिंह ने किया।
चंद्रदेव सिंह
प्रदेश अध्यक्ष-झारखंड

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल

भरत गांधी की पुलिस सुरक्षा बहाल करने के लिये ज्ञापन 

वीपीआई के प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल का न्यू बोंगाईगांव का में चल रहे प्रशिक्षण शिविर का कल देर रात समापन हो गया। प्रशिक्षण के अंतिम दिन पार्टी के पदाधिकारियों में गंभीर आक्रोश देखा गया। कारण यह था कि श्री भरत गांधी पर लगातार हुए हमलों के कारण उनको सन 2015 से पुलिस सुरक्षा प्राप्त थी। लेकिन उनके  लिए पुलिस सुरक्षा न्यू बंगाईगांव में दिखाई नहीं पड़ी। जब प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन भी पुलिस सुरक्षा बहाल नहीं दी गई तो पार्टी पदाधिकारियों का गुस्सा पुलिस प्रशासन पर फूट पड़ा और प्रशिक्षण शिविर में शामिल 500 पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देने के लिए प्रशिक्षण शिविर से एसपी कार्यालय तक मार्च करने का फैसला किया। किंतु पुलिस ने बीच बचाव किया और एसपी ने पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल बुलाया और अपने स्तर से जो भी संभव है पूरा करने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल ने असम के पुलिस महानिदेशक के नाम पुलिस अधीक्षक न्यू बंगाईगांव के माध्यम से श्री गांधी की पुलिस सुरक्षा बहाल करने के बारे में  और तमाम जनपदों में पार्टी पदाधिकारियों पर हुए हमलों  पर कानूनी कार्यवाही करने के मामले में ज्ञापन भेजा। समापन सत्र से पहले श्री भरत गांधी ने पार्टी पदाधिकारियों को मजबूर लोगों को न्याय दिलाने के लिये, अपने व अपने परिवार की आत्मरक्षा के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सूचना के अधिकार का उपयोग करना सिखाया।  उन्होंने कहा कि दुनिया विनाश के कगार पर खड़ी है
 प्रशिक्षण शिविर के  समापन सत्र में  पार्टी के विचारों से प्रभावित विद्यार्थियों का एक संगठन बनाने पर लंबी परिचर्चा की। बाद में वोटिंग के बाद यह तय किया गया कि पार्टी से संबद्ध विद्यार्थी संगठन का नाम होगा- ग्लोबल स्टूडेंट यूनियन। संक्षेप में इसे कहा जाएगा- जीएसयू।
इसके पहले वीपीआई स्टूडेंट यूनियन और इंटरनेशनल स्टूडेंट यूनियन के प्रस्ताव वोटिंग में गिर गए। अब जीएसयू के गठन का यह प्रस्ताव केंद्रीय कार्यालय को भेजा जाएगा, जहां से मंजूरी के बाद विद्यार्थी संगठन की सदस्यता शुरू की जाएगी।
 समापन सत्र से पहले  पार्टी प्रमुख  श्री भरत गांधी ने  पार्टी पदाधिकारियों को  पार्टी की विदेश नीति के संबंध में प्रशिक्षित किया। परमाणु बम के खतरों से लोगों को परिचित कराते हुए श्री भरत गांधी ने कहा की परमाणु बम से किसी की सुरक्षा नहीं होती अपितु दुनिया की सुरक्षा खतरे में पढ़ती है। उन्होंने कहा कि अगर यह मान लिया जाए कि देश की सुरक्षा के लिए परमाणु बम जरूरी है तो दुनिया के जितने देशो के पास परमाणु बम नहीं है उनको परमाणु बम देना जरूरी हो जाएगा। क्योंकि किसी भी देश को असुरक्षित क्यों छोड़ा जाना चाहिए। श्री भरत गांधी ने कहा कि या तो दुनिया के हर देश को  परमाणु बम मुहैया कराया जाए या फिर दुनिया के हर देश से परमाणु बम समाप्त किया जाए।   गांधी ने कहा कि नई संचार वीपप्रौद्योगिकी के इस युग में विदेश नीति के सारे सिद्धांत और राजनीति शास्त्र के पुराने सिद्धांत नए सिरे से गढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नए सिद्धांतों की रचना करने के लिए उन्हें दर्जनों पुस्तकें लिखना पड़ा श्री भरत गांधी ने कहा के निर्यात की निर्यात बढ़ाने की मजबूरी में दुनिया के हर देश को अपने अपने देश में गरीबी और बेरोजगारी बना कर रखना पड़ता है इसलिए इन समस्याओं से पीड़ित दुनिया भर के लोगों को एकजुट होना पड़ेगा और एक नई विश्व व्यवस्था की इमारत अपने हाथों बनाना होगा उन्होंने कहा कि वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल यही काम कर रही है।
भवदीय
ललित पेगू
प्रदेश अध्यक्ष
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल

प्रधानमंत्री के चुनाव का अधिकार सांसदों से  वापस लेकर देश के तीन लाख ग्राम प्रधानों को दे दिया जाए- भरत गांधी 

तेरापंथ  सभागार बंगाईगांव में चल रही वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों को प्रशिक्षित करते हुए पार्टी के प्रमुख श्री भरत गांधी ने आज एक ऐसी बात कहीं जिसने लोगों को चौंका दिया। उन्होंने कहा कि 5  करोड़ से 50 करोड़ तक खर्च करने वाला व्यक्ति ही अब सांसद बन सकता है। साइकिल और मोटरसाइकिल पर चलने वाले देश के 90% लोगों के लिए संसद के दरवाजे बंद हो चुके हैं। देश की इतनी बड़ी आबादी प्रतिनिधित्व विहीन हो गई है, बेसंसद और बेसरकार हो गई है। इनकी हाल खबर लेने वाला अब कोई बचा नहीं है।
राजनीतिक मामलों के जानकार  श्री भरत गांधी ने कहा कि ऐसी स्थिति में यह जरूरी हो गया है कि प्रधानमंत्री के चुनाव नियमों पर पुनर्विचार किया जाए। जिससे कि जनप्रतिनिधित्व और लोकतंत्र पुनः स्थापित किया जा सके। श्री भरत गांधी ने कहा की जिस परिस्थिति से हमारा देश गुजर रहा है उसमें आवश्यक हो गया है कि लोकतंत्र से लोगों का विश्वास उठने ना पाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए जरुरी हो गया है के प्रधानमंत्री का चुनाव करने का अधिकार सांसदों से वापस लेकर देश के तीन लाख गांव प्रधानों को दे दिया जाए।
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल (वीपीआई) के नीति निर्देशक ने कहा कि ऐसा करने से प्रधानमंत्री का पद अधिक लोकतांत्रिक हो जाएगा और प्रधानमंत्री की चिंता सीधे गांवों से जुड़ जाएगी और देश के नए प्रधानमंत्री को देश का खजाना खर्च करते वक्त देश की 90% आबादी का ध्यान रखना मजबूरी हो जाएगी। श्री गांधी ने इस व्यवस्था के फायदों को गिनाते हुए कहा कि इससे जहां भौगोलिक न्याय मिलेगा, वही गांवों का विकास होगा और गांव रहने लायक बन जाएंगे तो शहरों की तरफ पलायन रुक जाएगा। उन्होंने कहा  कि शहरों की भीड़ कम होने से शहरों का जीवन भी बेहतर हो जाएगा।
 राजनीतिक व्यवस्था के सुधार पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक श्री भरत गांधी ने कहा कि संसदीय प्रणाली के दोषों को भारत 70 सालों से देख रहा है और अध्यक्षीय प्रणाली की कमजोरियां अमेरिकी शासन प्रशासन में साफ दिखाई दे रही है, जहां सबकुछ धनवानों के हाथ में चला गया है। श्री भरत गांधी ने कहा कि भारत का रास्ता इन दोनों के बीच से होकर गुजरता है। जाने-माने राजनीति सुधारक श्री भरत गांधी ने  कहा कि न तो अध्यक्षीय प्रणाली ठीक है और ना ही संसदीय प्रणाली।
श्री भरत गांधी ने कहा के प्रधानमंत्री के चुनाव का अधिकार गांव के प्रधानों को दे दिया जाता है तो यह मध्यम मार्ग होगा और इस मार्ग से भारत के लोगों का अधिकतम कल्याण संभव है। उन्होंने सरकार से अपील किया किस देश के संविधान में संशोधन करने का काम तत्काल शुरू किया जाए। उन्होंने वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के कार्यकर्ताओं से अपील किया कि वह गांव गांव जाकर लोगों को वर्तमान चुनाव प्रणाली के खतरनाक परिणामों को बताएं और लोगों को इस राजनीतिक व्यवस्था की सविनय अवज्ञा करना सिखाए।
भवदीय
ललित पेगू
प्रदेश अध्यक्ष वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल
28 मई 2018

देश को केंद्र सरकार की  बेसिक इनकम नहीं ,  स्वदेशी वोटरशिप चाहिए- भरत गांधी

 न्यू बंगाईगांव  27 मई 2018 : वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के पदाधिकारियों को प्रशिक्षित करते हुए पार्टी के प्रमुख श्री भरत गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार जिस बेसिक इनकम का अधिकार देश के नागरिकों को देना चाहती है उससे लोगों को प्रतिदिन के हिसाब से केवल $1 यानी ₹65 मिल पाएंगे जिसके पीछे कोई भी तार्किक आधार नहीं है। यह सिद्धांत यूरोप के सामंती मानसिकता के सिद्धांत कारों द्वारा और गरीबों पर दयाा करनेेे वाले लोगों द्वारा गाया गया है।
राजा की दयालुता को लोकतंत्र में स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि प्रजातंत्र में राजा की नियुक्ति स्वयं प्रजा ही करती है और प्रजातंत्र में कानूनों द्वारा माननीय समस्त चल और अचल संपत्तियों का मूल स्वामी सामूहिक रुप से वोटर होता है भारत जैसे देश में जहां 80% से अधिक लोग पैसे की तंगी में जीते हैं उनको रोजाना ₹65 वाला यूरोपियन बेसिक इनकम नहीं चाहिए अपितु वोटरशिप का अधिकार चाहिए जिससे कम से कम उन्हें देश की औसत आमदनी की आधी रकम लगभग ₹6000 महीने मिल सके। ट्रेनिंग में लोगों को प्रशिक्षित करते हुए श्री भरत गांधी ने कहा कि वोटरशिप की रकम का निर्धारण तीन आधारों पर किया जाता है।
यह तीन आधार हैं: सकल घरेलू उत्पादन में मशीनों का हिस्सा राज्य के तंत्र का हिस्सा और प्राकृतिक संसाधनों का हिस्सा.
वी पी आई  के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने कहा सरकार को चाहिए कि वह सकल घरेलू उत्पाद में मशीनों के हिस्से का आकलन अलग से करें और मशीनों के हिस्से पर देश के वोटरों का सामूहिक स्वामित्व स्वीकार करने के लिए कानून बनाए। उन्होंने कहा कि मशीनों का हिस्सा वोवोटरशिप की रकम का पहला घटक है। श्री गांधी ने लोगों को समझाते हुए कहा की मशीन दो धारी तलवार है जहां एक तरफ वह उत्पादन बढ़ाती है और मशीन के मालिक को अमीरी देती है वहीं दूसरी तरफ वह करोड़ों लोगों को बेरोजगार करती और उन्हें गरीब बनाती है इसलिए अधिकारों की सर्वमान्य परिभाषा के कारण मशीन के परिश्रम से पैदा हुई पूरी आमदनी मशीन का मालिक नहीं रख सकता। इस आमदनी का एक हिस्सा वोटर के खाते तक पहुंचना ही चाहिए संसद में प्रस्तुत सैकड़ों सांसदों के इसी प्रस्ताव को वोटरशिप कहा जाता है। यह पैसा देश के नागरिकों को मिलने लगे तो देश के सैकड़ों समस्याएं एक झटके में खत्म हो जाएंगी।
भवदीय
ललित पेगू
प्रदेश अध्यक्ष वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल
27 मई 2018

भारत-पाकिस्तान की साझी अदालत बने तत्काल – भरत गांधी

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल द्वारा आयोजित राजनीति सुधारकों का चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन

न्यू बंगाईगांव, 26 मई 2018 : जाधव जैसे लोगों को न्याय मिले इसके लिए जरूरी है कि भारत पाकिस्तान की एक साझी अदालत बनाई जाए, जिसमें दोनों ही देशों के जज रहें। पाकिस्तान के किसी नागरिक के बारे में भारत की अदालत फैसला देगी तो निश्चित रूप से वह फैसला पूर्वाग्रह से ग्रस्त होगा। ठीक इसके विपरीत भारत के किसी नागरिक के बारे में पाकिस्तान की अदालत न्याय देगी, तो वह फैसला पूर्वाग्रह से ग्रस्त होगा ही। इसलिये यह जरूरी है कि न्याय भी हो और न्याय दिखाई भी पड़े। इसके लिए जरूरी है कि केवल भारत ही नहीं बल्कि भारत के सभी पड़ोसी देशों की एक साझी अदालत बनाई जाए और इसके लिए तत्काल प्रभाव से एक अंतर्राष्ट्रीय संधि की जाए।
उक्त बातें तेरापंथ भवन  न्यू बंगाईगांव असम में चल रही वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल  के पदाधिकारियों के तीन दिवसीय शिविर के उद्घाटन सत्र में  तमाम जनपदों से आए हुए  पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा।  विश्व राजव्यवस्था पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक श्री भरत गांधी ने कहा कि संधि का मसौदा उन्होंने सभी देशों के विदेश मंत्रियों को विचार करने के लिए 15 सितंबर  2015 को ही भेज रखा है, भारत सरकार उसी संधि की पैरवी करें तो काम बन जाएगा।  भरत गांधी फाउंडेशन और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल की असम कमेटी द्वारा संयुक्त रुप से आयोजित ट्रेनिंग को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और उसके पड़ोसी देशों का एक साझा वतन पहले से मौजूद है। आज जरूरत है इस वतन को शासन-प्रशासन का अधिकार देने की। इस वतन की केवल अदालत ही नही, अपितु इस अदालत को काम करने के लिए कानून भी बनाए जाएं। इन कानूनों को बनाने के लिए दक्षिण एशियाई वतन की साझी संसद और सरकार भी बनाया जाए। श्री गांधी ने कहा कि युरोप के 27 देश मिलकर ऐसा कर चुके है।  श्री गांधी ने कहा कि यूरोप के देशों ने जो काम किया वही काम दक्षिण एशियाई वतन के देशों ने कर लिया तो असम में एनआरसी की समस्या का अपने आप हल हो जाएगा क्योंकि चिन्हित किए गए विदेशियों को तब दक्षिण एशिया की नागरिकता दी जा सकती है।
राज्य व्यवस्था में सुधार के मुद्दे पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक श्री भरत गांधी ने कहा कि कारपोरेट ताकतों के कारण टेलीविजन चैनलों की जो नई भूमिका पैदा हो गई है उसको देखते हुए अब इस काम को टाला नहीं जा सकता।
श्री भरत गांधी ने कहा  कि टेलीविजन चैनलों के मालिक पैसा कमाने के लिए देश की जनता में इतना ज्यादा गुस्सा भर दें रहे हैं कि ना चाहते हुए भी पड़ोसी देशों में युद्ध हो जाएगा और इस युद्ध में टेलीविजन चैनलों के मालिक नहीं मारे जाएंगे बल्कि भारत और पाकिस्तान के गरीब बच्चे मारे जाएंगे। जो दोनों देशों की सेनाओं में काम कर रहे हैं। श्री भरत गांधी ने  प्रशिक्षण शिविर में पहले दिन बोलते हुए कहा कि भारत-पाकिस्तान की शाझी अदालत, साझी संसद और साझी सरकार बन जाने के बाद सुरक्षा पर किया जा रहा बहुत सारा वह खर्च बच जाएगा जो आज अमेरिका को रक्षा सौदों की खरीद में भेजना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह बची हुई रकम दोनों देश अपने अपने देश की जनता के समृद्धि पर खर्च कर सकते हैं  इससे दोनों ही देशों की विकास दर बढ़ जाएगी और भविष्य में एक नहीं, सभी कुलभूषण जाधवों को न्याय मिल सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार श्री भरत गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय कुलभूषण जाधव जैसे लोगों को न्याय नहीं दिला सकता क्योंकि फांसी दिया जाए या न दिया जाए यह फैसला अंत में सुरक्षा परिषद करेगी। जिसमें चीन सहित केवल 5 देशों के मुखिया हैं।  एक भी देश का मुखिया अगर कुलभूषण जाधव को फांसी पर लटकाने के पक्ष में चला गया तो कुलभूषण जाधव को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय फांसी से बचा नहीं सकता। जब भारत चीन को अपना दुश्मन मानता रहा है, तो दुश्मन से न्याय की उम्मीद भारत को क्यों करनी चाहिए?
श्री गांधी ने कहा कि यह सही वक्त है कि  केवल देश के स्तर पर ही नहीं, दुनिया के स्तर पर भी कानून का राज कायम किया जाए। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय संधि किया जाए। उन्होंने कहा कि इस संधि का यह मसौदा उनकी टीम ने पूरी तरह तैयार करके रखा हुआ है और दुनिया के 198 देशों के सरकारों को विचार करने के लिए उनके समक्ष प्रस्तुत किया है।  उन्होंने भारत सरकार से अपील किया कि ग्लोबल एग्रीमेंट ऑन पार्टिसिपेशन एंड पीस, गैप के नाम से बनाई गई इस संधि की पैरवी करने में सरकार मदद करे। उद्घाटन सत्र का संचालन आर्थिक आजादी आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष श्री तरनी बासुमतारी ने किया। वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल (वीपीआई) के प्रदेश अध्यक्ष श्री ललित पेगू ने लोगों को ट्रेनिंग के उद्देश्यों के बारे में बताया। ट्रेनिंग में पार्टी के लगभग 500 पदाधिकारी भाग ले रहे हैं । यह ट्रेनिंग 3 दिनों तक चलेगी।
तरुणी बसुमतारी
प्रेस प्रवक्ता
राजनीतिक सुधारों का प्रशिक्षण शिविर न्यू बोंगाई गाँव

अपने बच्चों को कामयाब करना है तो सोच बड़ी बनाएं : भरत गांधी

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल द्वारा आयोजित राजनीति सुधारकों का चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का समापन
ढेकियाजुली 19 मई 2018 : सोनितपुर जिले के ढेकियाजुली कस्बे में 4 दिन से चल रहा राजनीति सुधारकों का प्रशिक्षण शिविर आज समाप्त हो गया। शिविर के समापन समारोह को संबोधित करते हुए श्री भरत गांधी ने कहा कि दुनिया में कोई काम बड़ा और छोटा नहीं होता। केवल अपनी अपनी दृष्टि छोटी या बड़ी होती है।
उन्होंने कहा कि जो लोग बड़े कामों को बड़ा समझकर दूर हट जाते हैं या बड़ा काम करने वालों का मजाक उड़ाते हैं, वह अपनी जिंदगी में तो नाकाम हो ही जाते हैं उनके बच्चे भी कामयाब नहीं हो पाते।  श्री भरत गांधी ने कहा कि अगर आप अपने बच्चों को कामयाब करना चाहते हैं तो आप खुद या तो बड़ा काम करिए या किसी बड़े काम में सहयोगी बने या फिर कोई भी काम करते हुए बड़े काम करने वालों की प्रशंसा करते रहिए और उनको सफलता की दुआएं देते रहिए। आप क्या करते हैं और क्या सोचते हैं, इसका आपके बच्चों पर सीधा असर पड़ता है।
 श्री भरत गांधी ने वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के कैडर शिविर के अंतिम दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर  जरूरी राजनीतिक सुधार के टिप्स लोगों को बताए। उन्होंने कहा कि देश की आम जनता की तकलीफ देसी सरकारों से हल नहीं हो सकते, क्योंकि उनकी समस्याएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय सरकार चाहिए।
 राज व्यवस्था और अध्यात्म पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक श्री भरत गांधी ने कहा कि भारत के पड़ोसी देशों को यूरोपियन यूनियन के तर्ज पर एकजुट हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई शांति सुरक्षा और समृद्धि के लिए ऐसा करना नितांत जरूरी है। श्री भरत गांधी ने कहा के दक्षिण एशियाई शासन-प्रशासन बनते ही असम की एनआरसी की समस्या हल हो जाएगी क्योंकि जो भी लोग दूसरे देशों के हैं उनको दक्षिण एशियाई नागरिकता दी जा सकती है।
श्री भरत गांधी ने कहा की वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल दक्षिण एशिया को एकजुट करके ही मानेगी। उन्होंने कहा कि इसीलिए इस पार्टी का नाम अंतर्राष्ट्रीय शब्द जुड़ा है। वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रमुख श्री गांधी ने कहा के बुद्धिजीवियों में और नेताओं में व्यवहारिक दिखने की कोशिश में असली समस्याओं का नकली समाधान देने का चलन चल पड़ा है, जो दुखद है। उन्होंने कहा कि गरीबी बेरोजगारी भ्रष्टाचार आतंकवाद जैसी समस्याएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैं और इनका समाधान कोई अंतर्राष्ट्रीय सरकार ही कर सकती है। इसके लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि के लिए वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के कार्यकर्ता रात-दिन काम कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बड़ा काम होते हुए भी एक दिन यह पार्टी कामयाब जरूर होगी।
तरुणी बसुमतारी
प्रेस प्रवक्ता
राजनीतिक सुधारों का प्रशिक्षण शिविर ढेकियाजोली
19.05.2018
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल द्वारा आयोजित राजनीति सुधारकों के प्रशिक्षण का तीसरा दिन

  विश्व व्यापार संगठन के कारण बंधक बन गई है देशों की सरकारें- भरत गांधी 

ढेकियाजुली, 18 मई, 2018 : सन 1994 में गैट नाम से एक अंतर्राष्ट्रीय संधि हुई और विश्व व्यापार संगठन का गठन किया गया। इससे पूरे संसार का बाजार एक और साझा हो गया। इस कारण मशीनों से पैदावार करके सस्ती से सस्ती और अच्छे से अच्छे क्वालिटी का सामान पैदा करने की विश्वव्यापी होड़ लग गई है। इससे पूरे संसार में बेरोजगारी भी फैल रही है और धन का खजाना भी फैल रहा है। सरकार और बाजार से लोगों की लगातार छटनी हो रही है। बेरोजगारी के कारण गरीबी बढ़ रही है और गरीबी के कारण जनसंख्या का विस्तार होता जा रहा है।
उक्त बातें वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रमुख श्री भरत गांधी ने राजनीति सुधारकों के प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए तीसरे दिन कहा।
श्री गांधी ने कहा कि इन जानकारियों से दूर  रहने के कारण आम तैर पर लोग यह समझते है कि अपने देश की सरकार देश से गरीबी बेरोजगारी महंगाई भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसी समस्याएं खत्म करने के लिए करती है. जबकि हकीकत इसके ठीक उलट है। देश की सरकार अपने देश में गरीबों के हाथ तक पैसा पहुचने दे, तो गरीब लोगों के काम का रेट बढ़ जाता है। इससे देश में बनी हुई सामान महंगी हो जाती है और देश का निर्यात घट जाता है। इसलिए देश का ज्यादा से ज्यादा सामान दूसरे देशों में बेचने के लिए सरकार को अपने देश में ज्यादा से ज्यादा लोगों को गरीब बना कर रखना पड़ता है।
नई विश्व व्यवस्था पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक श्री भरत गांधी ने प्रशिक्षण शिविर में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की सरकार देश के कल-कारखानों में मशीन से काम कराने के रस्ते पर चले तो विदेश में समान ज्यादा बिकेगी क्योंकि सस्ती होगी और सुंदर होगी. लेकिन इससे बेरोजगारी फैल जाती है. अगर बेरोजगारों को काम देने के रस्ते पर चले, मशीनें हटाये तो निर्यात घट जाता है. इस प्रकार सरकार मजबूर होती है कि अपने अपने देश में वह गरीबी और बेरोजगारी बढ़ाएं और देश के लिए ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाए. लेकिन वह पैसा देश के नागरिकों में ना बांटने दे.
श्री गांधी ने देश की  तमाम समस्याओं का जिक्र करते हुए लोगों को बताया कि   गरीबी, बेरोजगारी भ्रष्टाचार की तरह ही महंगाई, आतंकवाद, सांस्कृतिक पतन, पर्यावरण विनाश जैसी समस्याएं भी हर देश की सरकार अपने अपने देश में बनाये रखने के लिए मजबूर है. इन समस्याओं से निजात तभी मिल सकती है, जब संसार के सभी देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मिलकर एक अंतर्राष्ट्रीय संधि करें. समकालीन राजनीति सुधारक श्री भरत गांधी ने पूरे संसार के राष्ट्राध्यक्षों की ऐसी ही मजबूरी और घुटन को देख कर अंतर्राष्ट्रीय संधि का एक नया मसौदा तैयार किया और संसार के राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष सन 2015 में रखा. इस संधि का नाम है- “शांति और भागीदारी के लिए विश्वव्यापी संधि”. अंग्रेजी में कहते है- “ग्लोबल एग्रीमेंट ऑन पार्टिसिपेशन एंड पीस”.  जरूरत है इस संधि को लागू करने के लिए सभी देशों के नागरिक बुद्धिजीवी और राजनेता एक साझा प्रयास करें। अन्यथा देशों की सरकारें विश्व व्यापार संगठन की बंधक बनी रहेंगी और अपना काम नहीं कर पाएंगी।
तरनी बसुमतारी
प्रेस प्रवक्ता
राजनीति सुधारकों का प्रशिक्षण शिविर, ढेकियाजूली सोनितपुर असम

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल (VPI)

17 May, 2018

प्रेस विज्ञप्ति

  अमीर-गरीब में वही संबंध है, जो संबंध है मां और बच्चे में- भरत गांधी

(वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल द्वारा आयोजित राजनीति सुधारकों के प्रशिक्षण का दूसरा दिन)

बच्चा पैदा होते ही मां के स्तन में दूध फ्री में पैदा होता है। इसी तरह इंसान को पैदा करते ही उनके जीने के लिए प्रकृति फ्री में बहुत कुछ पैदा कर देती है। जिस प्रकार बच्चे के हिस्से का दूध  बच्चे के पास नहीं होता  बल्कि मां के स्तन में जमा हो जाता है। उसी प्रकार  गरीबों  के परिश्रम से  और उनके जन्म के कारण  उनके भरण पोषण के लिए जो फ्री में  धन पैदा होता है,  वह उनके पास नहीं रहता, अपितु संपन्न लोगों के बैंक खाते में जमा हो जाता है। इस “फ्री” में  एक वोटर का हिस्सा ही “वोटरशिप” है।  उक्त बातें सोनितपुर जिले के ढेकियाजूली  कस्बे में चल रही राजनीति सुधारकों के ट्रेनिंग में श्री भरत गांधी ने लोगों को प्रशिक्षित करते हुए बताया।

मशीनों के कारण पैदा हो रही बेरोजगारी  की तरफ से लोगों का ध्यान खींचते हुए  समकालीन राजनीति सुधारक और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने कहा  कि मशीनों की मेहनत से पैदा हुआ धन फ्री का धन है। समंदर के पानी में और जंगलों की लकड़ियों और फलों से तथा जमीन के अंदर मौजूद खनिज पदार्थ से हर महीना पैदा हो रहा खरबों रुपए फ्री का पैसा है, जिसे प्रकृति ने फ्री में दिया। इसी प्रकार तमाम कानूनों का फायदा उठाकर कुछ लोग अरबों रुपए हर महीना कमाते हैं। यह भी उनकी मेहनत का नहीं है, अपितु  कानून के कारण पैदा हुआ फ्री का धन है। यह जो तीन तरह के फ्री का पैसा है, यह कानून बनाने वाले वोटरों के बैंक खाते में हर महीना फ्री देने का कानून क्यों ना बनाया जाए?* वोटरों को मिलने वाले इसी प्रस्तावित पैसे को वोटरशिप कहा जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी इस खोज को संसद में सैकड़ों सांसदों ने पेश किया। संसद की कमेटी ने इसको मंजूर हुई कर लिया। लेकिन बात को दबा दिया गया। श्री गांधी ने कहा कि अगर वोटरशिप का कानून बन जाता तो वोटर के बैंक खाते में रू.5896 हर महीना मिलता। घर में चार वोटर हैं तो लगभग 24 हजार रुपए आता। इसके कारण न कोई बहुत अमीर होता है, ना बहुत गरीब होता।

राजनीतिक सुधार पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक श्री भरत गांधी ने कहा कि धरती के अंदर फ्री में पैदा हो रहे कोयला, लोहा, सोना, चांदी, डीजल, पेट्रोल,….. इसी तरह  पानी के अंदर  और जंगलों में फ्री में पैदा हो रही चीजों से  हर महीने  सरकार खरबों रुपए छापती है, जिसको खरबपति लोग हड़प लेते हैं। फ्री में पैदा होने वाले इस पैसे को  फ्री में वोटरों के खाते में बांटे जाने का कानून बने। उन्होंने कहा कि वोटरों को विकास में भागीदारी देने के लिए वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल  संघर्ष कर रही है।

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल की असम प्रदेश कमेटी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविर में 500 से ज्यादा लोग प्रशिक्षण ले रहे हैं। राजनीति सुधारने के टिप्स बताते हुए श्री भरत गांधी ने कहा कि सांसदों और विधायकों की वेतन भत्ते बंद नहीं होना चाहिए, अपितु नकली लोकतंत्र को असली लोकतंत्र बनाने के लिए वोटरों के भी चालू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी यह मांग संसद में सैकड़ों सांसदों ने प्रस्तुत किया।

वोटरों को फ्री में मिलने वाले पैसे का औचित्य बताते हुए श्री गांधी ने कहा कि बस का मालिक बस की कमाई में ड्राइवर से हिस्सा मांगता है। लोकतंत्र में सरकारें वोटरों की बसें हैंं। सरकार से होने वाली कमाई में हिस्सा लेना हर वोटर का अधिकार है।  इसी को कहते हैं वोटरशिप का अधिकार। श्री गांधी ने लोकतंत्र का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल चुनाव होने से लोकतंत्र नहीं आता। देश के खजाने में वोटर का हिस्सा होने से लोकतंत्र आता है।
तरनी बसुमतारी
प्रेस प्रवक्ता
प्रशिक्षण आयोजक समिति
17.05.2018

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल

प्रेस विज्ञप्ति

16 मई 2018

सफलता के लिए तीन चीजें जरूरी है- आत्म साक्षात्कार, कठोर परिश्रम और कानून की मदद- भरत गांधी

ढेकियाजुली असम में राजनीति सुधारकोंं की ट्रेनिंग मैं आए हुए प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री भरत गांधी ने कहा कि सफलता के लिए सबसे पहली जरूरत है कि खुद को समझा जाए। यह जाना जाए कि अपने अंदर कौन सा गुण और कौन सी प्रतिभा है जो औरों से ज्यादा है? यह जानने के लिए स्वयं से प्रश्न पूछना चाहिए और बार-बार पूछना चाहिए कि मैं सबसे अच्छा क्या कर पाता हूं? मैं क्या करने के लिए पैदा हुआ? मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है? किस क्षेत्र में में सबसे ज्यादा कामयाब हो सकता हूं?

राजनीतिक सुधार करो  और अध्यात्म पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक श्री भरत गांधी ने कहा कि यह प्रश्न कभी न कभी अपना उत्तर अवश्य देते हैं। चाहे यह उत्तर मिलने में दस या बीस साल लग जाएंं। लेकिन जिस दिन उत्तर मिलता है, सफलता की आधी यात्रा पूरी हो जाती है। जब यह समझ में आ जाए कि हमारी यह फील्ड है और यह काम करने के लिए मेरे अंदर जन्मजात योग्यता है तो उस काम को करने के लिए कठोर परिश्रम शुरू कर देना चाहिए। बिना परिश्रम के सफलता नहीं मिल सकती।

लेकिन परिश्रम करके भी सफलता जरूरी नहीं कि मिल ही जाए। यह देखना होता है की प्रकृति ने अपने अंदर जो जन्मजात गुण दिया है क्या उसके फलने-फूलने की अनुमति संसार के नियम कानून और संविधान और संस्कार देते  हैं या नहीं? संसार के नियम, कानून, संस्कार और परंपराएं नदी का वह पानी है जिसमें अपने को तैरना होता है। नदी का पानी जिस दिशा में बह रहा है हमें उसी दिशा में जाना हो तो कम परिश्रम से अधिक दूरी तय कर लेते हैं लेकिन नदी के धारा के विपरीत जाना हो तो ज्यादा परिश्रम से ही सफलता कम मिलती है। इसलिए आदर्श कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था वही है जिसमें हर व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास और उसकी योग्यता को फलने-फूलने के लिए कानून बनाए जाएं। ऐसे ही धार्मिक संस्कार बनाए जाएंं और ऐसा ही संविधान बनाया जाए।

श्री भरत गांधी ने कहा कि अपने को पहचानने का काम खुद अपना है। पहचानने के बाद परिश्रम करने की जिम्मेदारी भी खुद अपने ऊपर होती है। लेकिन अगर कुछ कानून दिखाई पड़ जाए जो अपने पैरों की बेड़ियां है और अपने को आगे बढ़ने में बाधाएं तो उन कानूनों को बदलने के लिए सामूहिक प्रयत्न की जरूरत होती है। श्री भरत गांधी ने कहा कि राजनीति सुधारकों की ट्रेनिंग में व्यक्ति के आत्मिक विकास से लेकर उसके सामूहिक विकास के लिए जरूरी कानूनी और संवैधानिक व्यवस्था का प्रशिक्षण दिया जाता है।

ट्रेनिंग के पहले दिन श्री भरत गांधी ट्रेनिंग के उद्देश्यों पर प्रकाश डाल रहे थे। ट्रेनिंग में लगभग 700 लोग भागीदारी कर रहे हैं, जो 4 दिन-रात ट्रेनिंग स्थल पर ही रहेंगे। इस ट्रेनिंग का आयोजन भरत गांधी फाउंडेशन ट्रस्ट मुंबई और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल की असम इकाई ने संयुक्त रुप से किया है। ट्रेनिंग प्रारंभ होने से पहले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री ललित पेगू ने  लोगों का स्वागत किया और ट्रेनिंग के लाभों से लोगों को परिचित कराया।
तरनी बासुमतारी

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल, असम

प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक : 12.02.2018

खानापाड़ा में वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल की विशाल रैली

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल राजनीतिक व्यवस्था और आर्थिक व्यवस्था के नए ब्लू प्रिंट के साथ राजनीति के मैदान पर उतरी है। इस पार्टी ने गुवाहाटी में सबसे पहला कार्यक्रम गुवाहाटी के प्रसिद्ध खानापाड़ा मैदान में किया, जिसमें पार्टी के लगभग 200000 कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की। पार्टी के संस्थापक श्री भरत गांधी के जन्मदिवस पर पार्टी हर साल आर्थिक स्वाधीनता दिवस मनाती है। यह रैली इसी मौके पर आयोजित थी, जिसमें पार्टी के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने निम्नलिखित विषयों पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया-

असम की गरीबी पर बोले भरत गांधी
राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक और राजनीतिक चिंतक श्री भरत गांधी ने कहा असम में गरीबी नहीं है। यह जानबूझकर बना कर रखी गई है। देश का निर्यात बढे, इसके लिए देश की सरकार लोगों को जानबूझकर गरीब बनाकर रखती है, इसलिए इसको गुलामी कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग आर्थिक विषमता पर लगाम लगाना चाहते हैं और देश की और दुनिया की समृद्धि में आम जनता को हिस्सेदारी दिलाना चाहते हैं, उन्हें संसद में सैकड़ों सांसदों द्वारा प्रस्तुत वोटरशिप के प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए और दक्षिण एशिया के स्तर पर और पूरे विश्व के स्तर पर एक साझी सरकार के गठन के लिए संघर्ष करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मशीनों से, प्राकृतिक संसाधनों से और राज्य की मशीनरी से पैदा हो रहा धन वोटरों के बीच उनके खाते में बांटने वाला वोटरशिप कानून बन जाए, तो गरीबी गुलामी खत्म तो होगी ही, सीमा से ज्यादा खतरनाक अमीरी भी खत्म हो जाएगी। श्री गांधी ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को भेजे गए मेमोरेंडम की जिक्र करते हुए कहा कि आज की रैली के माध्यम से यह मांग की जा रही है कि वोटरशिप का प्रस्ताव प्रदेश सरकार पारित करें और केंद्र सरकार को भेजें। केंद्र सरकार से मांग की गई है कि वोटरशिप के प्रस्ताव को अविलंब लागू करें और यूनिवर्सल बेसिक इनकम का नाम बदलकर वोटरशिप रखा जाए।

एनआरसी पर बोले भरत गांधी-
एनआरसी का जिक्र करते हुए श्री भरत गांधी ने कहा कि एनआरसी के नाम पर प्रदेश में फिर से आतंकवाद, खून- खराबा, शरणार्थी और भिखारियों की समस्या नहीं खड़ी की जानी चाहिए। इसलिए उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास से असम के निवासी होने का दस्तावेज ना प्राप्त हो, उनको दक्षिण एशिया की नागरिकता दे दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि असम की सरकार विधानसभा से इस आशय का प्रस्ताव पारित करके दिल्ली सरकार को भेजें और केंद्र सरकार यूरोपियन यूनियन की तर्ज पर तत्काल दक्षिण एशियाई वतन की सरकार बनाने के लिए पड़ोसी देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय संधि करें।

ईवीएम मशीनों की जगह चुनाव में बैलेट पेपर की मांग की भरत गांधी ने
श्री भरत गांधी ने गुजरात और उत्तर प्रदेश के चुनाव के जिक्र करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने यह चुनाव ईवीएम में धोखाधड़ी करके जीता है। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा खतरा पैदा हो गया है कि देश कारपोरेट घरानों के चंगुल में फंस गया है और एडवांटेज असम कार्यक्रम के नाम पर देश के कारपोरेट घरानों को असम के जंगल और जमीन पर कब्जा करने के लिए रास्ता खोल दिया गया है। लोगों की जगह-जमीन कब्जा की जाएगी। लोग त्राहि-त्राहि करेंगे और जनता की जगह-जमीन कब्जा कराने वाली पार्टी ईवीएम से चुनाव भी जीत लेंगी। उन्होंने कहा कि ईवीएम तकनीक से लोगों के वोट का अधिकार समाप्त हो गया है। इसलिए बैलेट पेपर का उपयोग करने के लिए विधान सभा प्रस्ताव पारित करें और केंद्र सरकार कानून बनाये।

असम की कानून व्यवस्था की आलोचना की भरत गांधी ने
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रमुख श्री गांधी ने कहा की जब-जब वोटर्स पार्टी का कार्यक्रम होता है, तब-तब असम में या तो रेल बंद कर दी जाती है या फिर रोड बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन यह बंद करने वालों के खिलाफ सरकार कोई कार्यवाही नहीं करती, जिससे पता चलता है कि सत्तारूढ़ भाजपा सरकार प्रदेश में अभिव्यक्ति के अधिकार को समाप्त करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का काम है कानून व्यवस्था बनाना। लेकिन अनुभव यह आ रहा है कि प्रदेश सरकार स्वयं संवैधानिक मशीनरी को पटरी से उतरने की आदी हो चुकी है। ऐसी सरकार को नैतिकता के आधार पर सत्ता छोड़ देनी चाहिए।

एआईआरएफ पार्टी को विश्वासघाती बताया भरत गांधी ने
श्री भरत गांधी ने कहा आपकी भारतीय जनता पार्टी आज सत्तारूढ़ है और जनता के ऊपर जुल्म ढा रही है। इसकी जिम्मेदारी मूल रूप से मुस्लिम समाज की तथाकथित पार्टी यूडीएफ की है। क्योंकि पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन न करके भारतीय जनता पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि गठबंधन न करने की फीस कितनी ली, यह तो कोई सक्षम जांच एजेंसी है बता सकती हैं।

कांग्रेस की आलोचना की भरत गांधी ने
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने कहा कांग्रेस की ढुलमुल नीति के कारण गरीबों के पक्ष में किए गए कामों का फायदा नहीं उठा सकी। कांग्रेस उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अब कोई सपना नहीं बचा है जिसके लिए वह संघर्ष करें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगर अपना काम कर रही होती, तो वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल की जरूरत नहीं होती।

पार्टी के अखिल भारतीय कमेटी के अध्यक्ष राज्य सभा के पूर्व सांसद श्री ब्रह्मानंद पासवान ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक देश के खजाने में वोटर को हिस्सा नहीं मिलता तब तक गुलामी नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि वोटरशिप भीख नहीं है। यह हर वोटर का जन्मसिद्ध अधिकार है।

प्रदेश अध्यक्ष ललित पेगू ने वोटरषिप और दक्षिण एशिया सरकार को असम के तत्कालीन जरूरत बताया
वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रदेश अध्यक्ष श्री ललित पेगू ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक वोटरशिप लागू नहीं होती, असम का विकास नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि असम को एडवांस करने का सबसे अच्छा तरीका है वोटरशिप लागू कर देना, जिसके बारे में ना तो मुकेश अंबानी ने कुछ कहा और ना ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने। उन्होंने कहा कि एडवांस असम के नाम पर असम को बेचने की छूट नहीं दी जा सकती। और एनआरसी के नाम पर असम के मूल निवासियों पर जुल्म नहीं ढाया जा जा सकता।
रैली को आर्थिक आजादी आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष श्री तरनी बासुमतारी, वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल उत्तर प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष हुकुम सिंह, असम प्रदेश कमेटी के सदस्यगण रंजय बासुमतारी, पूर्णिमा डेका, दीपाली सरनिया आदि लोगों ने संबोधित किया। कार्यक्रम में बोडो मिशन और असमिया कलाकारों ने मोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। श्री भरत गांधी के जन्मोत्सव कार्यक्रम का संचालन जाने-माने गांधीवादी नेता श्री हेम भाई की पुत्री प्रज्ञा दत्ता ने किया। श्री गांधी ने कबूतरों को आसमान में उड़ा कर अपने जन्मदिन को आर्थिक आजादी के प्रतीक के रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत किया।

भवदीय
ललित पेगू,
प्रदेश अध्यक्ष वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल
फोन- ललित पेगू – 094 01 618605
पूर्व सांसद बीए. पासवान 09810966952
केंद्रीय कार्यालय- 96 96 12 34 56

प्रेस विज्ञप्ति
17 नवम्बर 2017
विश्व दर्शन दिवस के अवसर पर संसद मार्ग पर आयोजित हुआ वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल का राष्ट्रीय सम्मेलन

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र संघ के अलोकतांत्रिक और अन्याय आधारित विधि-विधानों के कारण देशों के स्तर पर तो कानून का राज है लेकिन विश्व स्तर पर जंगलराज अभी भी चल रहा है। विश्व स्तर के इस जंगलराज ने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है। जब तक यूरोप के राजनीति शास्त्र के मौलिक सिद्धांतों जैसे राष्ट्र, राष्ट्रीयता, राज्य, नागरिकता, लोकतंत्र, प्रभुसत्ता और सत्ता के पृथक्करण को संशोधित नहीं किया जाता, तब तक ना तो विश्वशांंित सुनिश्चित की जा सकती है, ना जनसंख्या पर नियंत्रण किया जा सकता है और न ही दुनिया के बहुसंख्यक लोगों को समृद्धि और विकास में हिस्सा ही दिया जा सकता है। यह वक्तव्य वोटर्स पार्टी के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने दिया। श्री गांधी विश्व दर्शन दिवस समारोह के अवसर पर संसद मार्ग पर आयोजित वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
राजनीतिक सुधारों पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक श्री गांधी ने कहा कि 17 वीं और 18 वीं शताब्दी में नागरिकता, राष्ट्रीयता, प्रभुसत्ता और लोकतंत्र का जो ताना बाना बुना गया था, वह 250 सालों के बाद आज अप्रासंगिक और मृत हो गया है। श्री गांधी ने कहा कि उन्होंने दुनिया के 198 देशों के विदेश मंत्रियों और राष्ट्रपतियों को राजनीति शास्त्र के सिद्धांतों में संशोधन करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संधि का मसौदा भेजा है। अब भारत में वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल श्री भरत गांधी के उसी मसौदे को लागू करने के लिए संघर्ष कर रही है। श्री गांधी ने इस अवसर पर पार्टी के नीतिगत घोषणा पत्र का विमोचन भी किया।
पार्टी के अखिल भारतीय कमेटी के अध्यक्ष पूर्व सांसद श्री ब्रह्मदेव आनंद पासवान ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार की बहुत बड़ी गलती यह है कि यूनिवर्सल बेसिक इनकम के नाम से जो पैसा देश के लोगों को देने का प्रस्ताव सरकार कर रही है, उसको स्वदेशी नाम ना देकर विदेशी नाम दे रही है। इसको बेसिक इनकम की बजाय ‘वोटरशिप’ या ‘मतकर्तावृत्ति’ कहने से पूरे संसार में भारत को जो सम्मान मिलने का रास्ता खुला था, मोदी सरकार उसको बंद कर रही है। उन्होंने कहा कि श्री भरत गांधी ने वोटरशिप कानून बनाने के लिए 14वीं लोकसभा में संसद सदस्यों के साथ काफी लम्बा विचार विमर्श किया था। इस प्रस्ताव को सन् 2005 में लगभग सभी पार्टियों के 137 सांसदों ने भारत की संसद में रखा। उसी का परिणाम है कि देश में आधार कार्ड की योजना चलाई गई और सब्सिडी को डायरेक्ट लोगों के खाते में भेजने की नीति अपनाई गई। गैस सिलेंडर का पैसा लोगों को मिल रहा है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली का पैसा भी अब लोगों के खाते में जा रहा है। उन्होने कहा कि यह दुखद है कि मोदी सरकार ने अपनी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में वोटरशिप की योजना को तोड़ मरोड़ कर यूनिवर्सल बेसिक इनकम का नाम दे दिया और लोगों को उनका लोकतांत्रिक अधिकार ना देकर उनको भीख देने की योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल इस साजिश का पर्दाफाश जनता में कर रही है और आगे भी करेगी।
पार्टी के असम प्रदेश के अध्यक्ष ललित पेगू ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यदि देश के वोटरों को वोटरशिप का अधिकार मिल जाए, तो उसकी 10 या 5 प्रतिशत रकम सीधे उस व्यक्ति के खाते में भेजी जा सकती है, जिस व्यक्ति को चुनावों में वोटर अपनी वोट देता है। जो व्यक्ति अपने मनपसंद प्रत्याशी को वोट दे रहा है, वही व्यक्ति अपने मनपसंद प्रत्याशी को चंदा भी दे, राजनीतिक वित की यह आदर्श व्यवस्था होगी। उन्होने कहा कि यह आदर्श स्थिति यूनिवर्सल बेसिक इनकम से संभव नहीं है। यह केवल वोटरशिप कानून से ही संभव है।
वीपीआई के सम्मेलन में कुल पांच प्रस्ताव मंजूर किये गये। पहला- पार्टी के अखिल भारतीय और राष्ट्रीय कमेटी के अध्यक्षें का मनोनयन। ं पूर्व संसद सदस्य बी. ए. पासवान को अखिल भारतीय कमेटी का अध्यक्ष तथा हरियाणा के स्वामी सहजानंद को राष्ट्रीय कमेटी का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। दूसरा- पार्टी द्वारा मोदी सरकार के यूनिवर्सल बेसिक इनकम के प्रस्ताव को समर्थन किन्तु वोटरों को वोटरशिप अधिकार दिलाने के लिये गोयल कमेटी की सिफारिशों को लागू कराने के लिये संघर्ष जारी रखने के प्रस्ताव को मंजूरी। तीसरा-राजनीति करने वालों के लिये साफ सुथरे धन के प्रबंध के तौर पर वोट पाने वालों को सरकार द्वारा नोट देने के प्रस्ताव को मंजूरी। चैथा- राज्य की मशीनरी में ढांचागत सुधार के लिये भरत गांधी द्वारा तैयार गैप संधि के मसौदे पर अंतर्राष्ट्रीय सहमति के लिये संघर्ष को मंजूरी। पांचवां- राजनीतिक सुधार कार्यों का भुगतान सरकारी कोष से करने की मांग के प्रस्ताव को मंजूरी।
सम्मेलन को पार्टी के केन्द्रीय उपाघ्यक्ष विजय कुमार जैन, दिल्ली से वाल्मिीकि समाज के नेता बाल किशन महार, इंजीनियर सी के जैन, दिल्ली प्रदेश प्रभारी शिवाकांत गोरखपुरी, हरियाणा से स्वामी सहजानंद, बिहार से सिकंदर सिंह कुशवाहा व रामजी सिंह यादव, हैदराबाद से जय प्रकाश भारत, तेलंगाना से राजू व प्रेम गांधी, राजस्थान से सज्जन कुमार व माखनलाल, पश्चिम बंगाल से सोमाई मुर्मू, झारखण्ड से चन्द्रदेव सिंह व अमरेन्द्र सिंह. जम्मू कश्मीर से फैजल खान, गुजरात से हरि प्रसाद नेटहा व पंजाब से सिकन्दर सिंह ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष श्री हुकुम सिंह ने किया।
भवदीय

 

शिवाकान्त गोरखपुरी
कार्यक्रम संयोजक व
दिल्ली प्रदेश प्रभारी-वीपीआई

प्रेस वक्तव्य

 

22 अगस्त 2017

व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई भरत गांधी के साथ मिलकर लड़ेंगे लोकतंत्र सेनानी

 

लखनऊ, 22 अगस्त: आपातकाल में जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानी अब देश में भरत गांधी के साथ मिलकर राजनीति सुधारने का काम करेंगे। श्री गांधी ने देश के अनुकूल वैकल्पिक राजव्यवस्था व अर्थव्यवस्था का स्वदेशी ढांचा तैयार किया है। इन विषयों पर चार दर्जन से ज्यादा किताबें लिखी है और गत 25 सालों से ये काम करते रहे हैं। उनके कुछ प्रस्तावों को सौ से ज्यादा सांसदों ने संसद में भी प्रस्तुत किया है। गांधी भवन, लखनऊ में आयोजित एक दिवसीय विचार गोष्ठी में श्री भरत गांधी के नेतृत्व में लोकतंत्र सेनानियों ने भरत गांधी के साथ मिलकर राजनीति सुधारो अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का फैसला किया। श्री भरत गांधी लोकतंत्र सेनानियों को राजनीति सुधार के सूत्रों पर व्याख्यान देने लखनऊ आये थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जाने-माने संविधान विशेषज्ञ व लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष कश्यप ने की।  उद्घाटन संबोधन में लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के राष्ट्रीय महासचिव चतुर्भुज त्रिपाठी ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के आंदोलन को दबाने के लिये 1 जुलाई, 2017 के शाननादेश से जिलाधिकारियों को किसी के ऊपर भी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, रासुका लगाकर जेल भेजने का अधिकार दे दिया है। ये खबर मीडिया से गायब है। श्री त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान हालात आपातकाल से भी बुरे हैं। उन्होंने हॉल में आत्महत्या कर गये अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कलिखो पुल के 62 पृष्ठों के आत्महत्या नोट के तथ्यों से लोगों को परिचित कराते हुये कहा कि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह सड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि देश को इस हालत से भरत गांधी जैसा वैचारिक क्रांतिदूत ही बचा सकता है। श्री त्रिपाठी ने कहा कि मै श्री भरत गांधी के राजनीतिक व आर्थिक विचारों से बहुत प्रभावित हूँ और हमने फैसला किया है कि हम लोकतंत्र सेनानी उनके साथ कमर कसकर एक बार फिर उसी तरह खड़े होगे जैसे जयप्रकाश जी के साथ हम प्रथम आपातकाल के खिलाफ लड़े थे।

गांधी भवन, लखनऊ में भरत गांधी फाउण्डेशन एवं लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के संयुक्त तत्वाधान में एकदिवसीय गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय था-‘राजनीति सुधारों आन्दोलन में लोकतंत्र सेनानियों की भूमिका’। इस गोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन करते हुये जाने-माने संविधान विशेषज्ञ व लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष कश्यप ने कहा कि चुनाव सुधार के बिना इस देश में किसी सुधार की कल्पना नही की जा सकती। उन्होंने कहा कि ऐसे कानून बनाया जाना आवश्यक है जिससे किसी भी चुनाव में आधे से ज्यादा वोट पाना अनिवार्य हो जाय।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात राजनीतिक विचारक श्री भरत गांधी ने लोकतंत्र सेनानियों को राजनीति सुधार के 25 सूत्रों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के नाम पर पश्चिमी सोंच से और संस्कृतिप्रेम के नाम पर इतिहासग्रस्तता से हमें उबरना पड़ेगा। श्री गांधी ने कहा कि कि नेताओं,  अधिकारियों, व्यापारियों व मीडिया को गाली देना तब तक व्यर्थ है, जब तक वैकल्पिक राजव्यवस्था व अर्थव्यवस्था का कोई मॉडल सामने न हो। उन्होंने कहा कि आज की व्यवस्था कूबड़ वाले ऊंट जैसी है। इस ऊंट पर जो भी बैठेगा, उसे कमर हिलाना ही पड़ेगा और जो लोग कभी ऊंट पर नहीं बैठे हैं, उनसे गालियां सुनना ही पड़ेगा, क्योंकि वे कमर हिलने की असली वजह नहीं जानते।

गोष्ठी में बोलते हुए श्री गांधी ने कहा, ‘देश में आपातकाल लगा, तो लोकतंत्र सेनानियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर मुकाबला किया। उन्होंने अपना परिवार खोया, अपनी जवानी खोयी, काम-धन्धा खोया, खेती-बाड़ी खोयी, अपना स्वास्थ्य खोया और कईयों को तो अपनी जान गंवानी पड़ी। उस समय मीडिया ने कुछ ऐसा माहौल बना दिया था कि इंदिरा को सत्ता से हटाया जायेगा, तो एक नये राष्ट्र का निर्माण होगा, जिसमें गरीबी, बेरोजगारी, विषमता, भ्रष्टाचार, अपराध, गुण्डागर्दी, सांस्कृतिक पतन आदि कुछ नहीं होगा। लेकिन यह सपना बहुत जल्द उसी तरह चकनाचूर हो गया, जैसे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का आजाद भारत का चकनाचूर हुआ था। इंदिरा गांधी को हटाने वाली जनता पार्टी तहस-नहस हो गयी। कांगे्रस दोबारा से आ गयी। इसके बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ 1987 में वी.पी.सिंह जी आये। लेकिन हालात जस के तस रहे। उन्होंने सपना दिखाया कि पिछड़े और दलित सत्ता संभाल लें व ओ.बी.सी को आरक्षण मिल जाये, तो सब ठीक हो जायेगा। पिछड़े और दलितों को सत्ता मिली भी। लेकिन कुछ हुआ नहीं। मुट्ठी भर लोगों को अमीरी मिल गयी, बाकी लोग जहां के तहां रह गये। उसके बाद नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की जोड़ी यह कहकर आयी कि दूसरे देश के लोगों को अपने देश में धंधा-बिजनेस करने की छूट दे देंगे, तो देश में चारों तरफ पैसा ही पैसा हो जायेगा, मगर ऐसा नहीं हुआ। बाजपेयी जी स्वदेशी के सपने के साथ आये। लेकिन 24% विदेशी निवेश का कानून बनाकर देश के मीडिया को ही विदेशों को गिरवी रखकर चले गये। अन्ना हजारे और उनकी टीम के लोग भ्रष्टाचार रोकने आये थे, लेकिन उनकी टीम भ्रष्टाचार में लिप्त हो गयी। हिन्दू राज का सपना दिखाकर मोदीजी आये। लेकिन हिन्दूवाद और राष्ट्रवाद के नाम पर देशी-विदेशी खरबपति पूरे देश को अजगर की तरह निगल रहे हैं। भाजपा के पुराने सिद्धांत और पुराने नेता, दोनों को दफन कर दिया है। लोगों में भारी असंतोष है। लेकिन लोगों के असंतोष के सुर में मीडिया सुर मिलाने को तैयार नहीं है। एक बार फिर आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गयी है। इस बार आपातकाल मीडिया पर नहीं लगा है, खरबपतियों ने मीडिया के सहारे आम जनता पर लगाया है।

भारत की राजव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने के लिए श्री भरत गांधी 2002 से राजनीति सुधार के कार्यक्रम चला रहे हैं। भारत की संसद के लगभग 400 सांसदों को वे राजनीतिक सुधारों के बारे में व्याख्यान दे चुके हैं,  उन्हें समझा चुके हैं और 137 सांसद उनके सुधारों पर संसद में कानून बनाने के लिए प्रस्ताव भी पेश कर चुके हैं। नागरिकों और देशों की राजनीतिक और आर्थिक आजादी के लिए अन्तर्राष्ट्रीय संधि का मसौदा तैयार किया है व दुनिया के 198 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष स्वीकार करने हेतु रखा है। अविवाहित रहकर एक त्यागी-तपस्वी का जीवन जीने वाले श्री भरत गांधी व्यवस्था परिवर्तन करने के लिए ‘राजनीति सुधारो अभियान’ चला रहे है, तथा देश भर में राजनीति सुधारकों को प्रशिक्षित करने के लिए व्याख्यान देते हैं। संसद में सैकड़ो सांसदों के समर्थन के बाद भी जब उनके प्रस्ताव पर सामाजिक सुरक्षा के लिये कानून नहीं बना तो उनके समर्थकों ने सन् 2012 में एक नई राजनीतिक पार्टी बना लिया, जिसके श्री भरत गांधी नीति निर्देशक हैं। यह पार्टी कन्नौज अपहरण काण्ड में कानूनी कार्यवाही करने के कारण आजकल चर्चा में है।

गोष्ठी में लोकतंत्र सेनानी संगठन के श्री गिरीश सक्सेना, पी. के. त्रिपाठी, माता प्रसाद तिवारी, सोवरन सिंह कुशवाहा, राम स्वरूप लोधी, राम शंकर गुप्ता आदि सेनानियों ने और वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के प्रदेश अध्यक्ष हुकूम सिंह, सादेश अली मशीह व सुरेन्द्र प्रधान भी अपने विचार रखें।

भवदीय

 

 

 

(पी. के . त्रिपाठी)

लोकतंत्र सेनानी कल्याण परिषद के उपाघ्यक्ष व

महासचिव- कार्यक्रम आयोजक/स्वागत समिति

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प्रेस वक्तव्य
वोटरशिप कानून बने बिना गरीबी नहीं जायेगी – भरत गांधी
वीपीआई प्रमुख ने कहा कि देश में भ्रष्टाचार की समस्या गंभीर। जब तक उत्तराधिकार का सीमांकन का कानून नहीं बनता, तब तक देश से भ्रष्टाचार नहीं जाएगा।
लखनऊ, 10 अगस्त 2017: देश में गरीबी और भ्रष्टाचार बहुत गंभीर समस्या बन गये हैं। जब तक देश में उत्तराधिकार का सीमांकन का कानून नहीं बनता, तब तक भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होगा और जब तक वोटरषिप कानून नहीं बनता, तब तक देश से गरीबी दूर नहीं होगी। यह बात गांधी भवन, लखनउ में आयोजित ‘वोटरशिप और सुशासन के लिए जरूरी कानूनी सुधार’ विषय पर व्याख्यान देते हुए श्री भरत गांधी ने कही।
इस बारे में विस्तार से समझाते हुए श्री भरत गांधी ने कहा कि वोटरशिप कानून बनाकर मशीनों से पैदा हो रहे धन को जब तक देश के वोटरों में बेशर्त नहीं बांटा जाता, तब तक गरीबी किसी सूरत नहीं जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार का मूल कारण सीमाहीन उत्तराधिकार कानून है। जब तक उत्तराधिकार कानून की सीमा नहीं बनती, तब तक भ्रष्टाचार नहीं जा सकता। उत्तर प्रदेश के राजनीति सुधारकों और बुद्धिजीवियों के प्रषिक्षण कार्यक्रम में व्याख्यान देते हुए श्री भरत गांधी ने पूछा कि क्या उत्तराधिकार की कोई सीमा नहीं बननी चाहिए? खरबपतियों के बच्चे बिना कुछ किए धरे और बिना किसी परीक्षा के केवल कानून की ताकत से खरबपति बना दिए जाने चाहिए? श्री गांधी ने असीमिति उत्तराधिकार कानून के दुष्परिणाम पर प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि संसार में कुछ भी नहीं है जिसकी सीमा न हो, लेकिन उत्तराधिकार है, जिसकी कोई सीमा नहीं है। आप जिंदगी में लूटमार करके कुछ भी कमा लीजिए, यहां तक कि पूरा देश का मालिकाना हासिल कर लीजिए, तो दोषी उत्तराधिकार कानून से वह आपके बच्चों को बिना मेहनत किये और बिना कोई परीक्षा दिये मिल जायेगा।’
नई अर्थव्यवस्था और नई राजव्यवस्था पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक और जाने-माने राजनीति सुधारक श्री भरत गांधी ने बताया कि जापान में 80 प्रतिशत उत्तराधिकार की संपत्ति व्यक्ति की मृत्यु के बाद राष्ट्र को चली जाती है। इसलिए जापान छोटा सा देश है लेकिन दुनिया का ताकतवर बना। चीन तो आगे गया ही इसलिए कि वह उत्तराधिकार को नहीं मानता। लेकिन भारत जैसे बड़े देश में उत्तराधिकार की कोई सीमा नहीं है। यही सीमाहीन उत्तराधिकार कानून समस्याओं की जड़ है। इसी कानून से गरीबी है, इसी कानून से बेरोजगारी है, इसी कानून से विषमता है, इसी कानून से भ्रष्टाचार है, इसी कानून से असुरक्षा है और इसी कानून से सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्र को खतरा है। श्री गांधी ने इस विषय में कारणें को स्पष्ट करते हुए कहा कि अधिकारी, नेता, सरकारी कर्मचारी, सब में लूटमार की होड़ मची है, क्योंकि वे जानते हैं कि यही पैसा मृत्यु के बाद आगे बच्चों को जाएगा। ईमानदारी से कुछ करोगे तो तुम्हारे बच्चे सड़कों पर दिखाई देंगे। बाप ईमानदार डॉक्टर है तो उत्तराधिकार में बेटे को डॉक्टर की डिग्री नहीं मिलेगी। बाप ईमानदार अधिकारी है तो बेटे को उत्तराधिकार में आईएएस और पीसीएस की डिग्री नहीं मिलेगी। बाप ईमानदार एमपी, एमएलए और मंत्री है, तो बेटे को उत्तराधिकार में सांसद विधायक और मंत्री नहीं बनाया जाएगा। उसको चुनाव लड़ना पड़ेगा और जीतना पड़ेगा। इसीलिए ईमानदारी केवल अनपढ़ लोगों पाई जाती है। ज्यादातर पढ़ा लिखा आदमी कानून की यह साजिश समझ जाता है और बेईमान हो जाता है। श्री गांधी ने देश की गम्भीर समस्याओं का विश्लेषण करते हुए कहा कि उत्तराधिकार कानून भ्रष्टाचार की गंगोत्री है। यदि कोई व्यक्ति गरीबी, बेरोजगारी, विषमता, भ्रष्टाचार, सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्र के लिए लड़ता दिखाई पड़े, लेकिन उत्तराधिकार का समर्थन करे, तो समझिए कि उसकी लड़ाई झूठी है। इसीलिए जब तक उत्तराधिकार पर कोई सीमा नहीं बनती, देश में भ्रष्टाचार खत्म नहीं किया जा सकता। यदि उत्तराधिकार का सीमांकन का कानून बन जाता है, तो सरकार को इतना पैसा मिल जायेगा कि देश के वोटरों को वोटरषिप कानून के तहत बड़ी रकम दी जा सकती है।
प्रषिक्षण व्याख्याान में श्री गांधी ने बेरोजगारी आतंकवाद, विषमता, अपराध, विष्व शांति और विष्व सुरक्षा इत्यादि विषयों पर भी प्रकाश डाला और इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवष्यक कानूनी सुधारों के बारे में लोगों को बताया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में लखनउ, उन्नाव, कानपुर, कन्नौज, औरैया, फर्रूखाबाद, इटावा, एटा, अलीगढ़ और कानपुर देहात के बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन श्री भरत गांधी के विचारों को कार्यरूप देने के लिए कार्यरत भरत गांधी फाउण्डेशन ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुछ विषयों पर वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के दलित मोर्चा के संयोजक श्री एम. एस. अम्बाड़ी , वीपी आई प्रदेश अध्यक्ष श्री हुकुम सिंह, श्री सादेश यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किये। नवीन कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल

प्रादेशिक कार्यालय: 6/1067, जानकीपुरम एक्स्टेंषन, लखनऊ

  दिनांक: 10 अगस्त 2017

प्रेस विज्ञप्ति

कन्नौज अपहरण काण्ड में मानवाधिकार आयोग ने मामले को फुल बेंच को भेजा

उ. प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेष यादव द्वारा प्रायोजित कन्नौज अपहरण काण्ड में श्री भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा नहीं देने से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग क्षुब्ध

लखनऊ, 10 अगस्त 2017: कन्नौज अपहरण कांड में समाजवादी पार्टी के प्रभावशाली अपराधियों को दंडित करने के लिए सन 2012 से लगातार कानूनी कार्यवाही कर रहे भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा न दिए जाने से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग क्षुब्ध हो गया है और उसने अब श्री भरत गांधी के केस की सुनवाई एकल पीठ से स्थानांतरित करके आयोग की पूर्ण पीठ को सौंप दी है। श्री भरत गांधी ने लखनऊ में मीडिया से मुखातिब होकर यह जानकारी दी।श्री गांधी गांधी भवन, लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा प्रायोजित कन्नौज अपहरण काण्ड मे चल रही मीडिया रिपोर्टिग में तथ्यात्मक त्रुटियों को संशोधित करने व मीडिया को सही तथ्यों से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित प्रेस वार्ता में मीडिया से बात कर रहे थे। श्री गांधी ने बताया कि वे 2012 से लगातार कन्नौज अपहरण काण्ड में कार्यवाही कर रहे हैं और उन पर कई बार हमले हो चुके हैं। मानवाधिकर आयोग श्री भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा देने के लिए सन 2014 से लेकर अब तक कई आदेश जारी कर चुका है, लेकिन अखिलेश सरकार ने किसी भी आदेश का अनुपालन नहीं किया। अब योगी सरकार आने पर अनुपालन शुरू हुआ किंतु पुलिस सुरक्षा अभी तक नहीं दी गई है। हालांकि प्रदेश के गृह ने सचिव भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश गत 19 अप्रैल को ही दिया था, लेकिन उस आदेश का अनुपालन भी अभी तक नहीं हुआ है। 19 अप्रैल को उसी दिन आयोग ने मामले की सुनवाई के लिए श्री गांधी के मामले की फाइल आयोग की पूर्ण पीठ को भेज दी और प्रदेश सरकार को आदेशित किया है कि श्री गांधी के मामले की जांच उत्तर प्रदेष की सीबीसीआईडी से करवाके आयोग को रिपोर्ट सौंपी जाय और श्री गांधी को अविलम्ब पुलिस सुरक्षा दी जाए।श्री गांधी धर्म, अध्यात्म, उद्विकास विज्ञान, नई अर्थव्यवस्था और नई राज्यव्यवस्था पर दर्जनों पुस्तकें लिख चुके हैं व भारत के संविधान में संशोधन प्रस्ताव तैयार करके सन 2000 में राष्ट्रपति को सौंप चुके हैं। राजनीतिक व्यवस्था को सुधारने संबंधी उनका एक प्रस्ताव भारत की संसद में 137 सांसद सन 2005 में प्रस्तुत कर चुके हैं। वर्तमान में श्री गांधी राजनीतिक सुधार के लिए कार्यरत हैं और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के प्रमुख हैं। इस पार्टी के संविधान में पार्टी के प्रमुख को नीति निर्देशक कहा जाता है। आरोप है कि इसी पार्टी के प्रत्याशी प्रभात पांडे और पार्टी के नेता सादेश यादव और राम सिंह लोधी व नामांकन के प्रयासरत अन्य प्रत्याषियों का अपहरण 6 जून 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी की पत्नी श्रीमती डिंपल यादव के उपचुनाव के दौरान करा लिया गया था। किसी को नामांकन पत्र नहीं भरने दिया गया था और डिंपल यादव को निर्विरोध सांसद घोषित कर दिया गया था। वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल ने हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में वाद दाखिल किया और इस मुद्दे पर लगातार संघर्ष करती रही है। किंतु अखिलेश सरकार ने अदालती आदेशों का अनुपालन नहीं किया। इसीलिए माननीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने क्षुब्ध होकर मामले को 24 फरवरी 2016 को प्रदेश की सीबीसीआईडी को दे दिया। मामला सीबीसीआईडी तक 24 फरवरी 2016 में इसलिए पहुंचा, क्योंकि वीपीआई प्रमुख भरत गांधी पर 3 बार हुए हमलों के बावजूद भी अखिलेश सरकार ने श्री गांधी  को पुलिस सुरक्षा मंजूर नहीं की। मानवाधिकार आयोग केवल मानवाधिकारों के हनन संबंधी मामले पर ही विचार करता है, इसलिए यदि श्री गांधी को पुलिस सुरक्षा दे दी जाती तो मानवाधिकार आयोग से श्री गांधी की याचिका 2014 में ही निस्तारित हो जाती। अपराधिक मामलों की सुनवाई का अधिकार न्यायालयों को है। किंतु जब पुलिस ने काम करना बंद कर दिया और पुलिस के गलत कार्यों के सबूत माननीय आयोग के समक्ष श्री गांधी ने प्रस्तुत किये, तब आयोग ने सीबीसीआईडी जांच का निर्देश उत्तर प्रदेश के गृह सचिव को 24 फरवरी 2016 को दिया और अब जब पूरे एक साल तक भी आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ और श्री गांधी को पुलिस सुरक्षा नहीं दी गयी, तो मानवाधिकार आयोग ने क्षुब्ध होकर अपने नवीनतम आदेश 19 अप्रैल 2017 में मामले को एकल पीठ से स्थानान्तरित करके आयोग की पूर्ण पीठ को सुनवाई के लिए भेज दिया है। इससे कन्नौज अपहरण काण्ड के अभियुक्तों की मुश्किलें और बढ़ गयी हैं। कन्नौज अपहरण कांड में लगभग 800 लोगों पर सैकड़ों लोगों का अपहरण करने का आरोप है। मानवाधिकार आयोग की वेबसाइट www.nhrc.nic.in पर भरत गांधी की केस संख्या 40582/24/48/2013 द्वारा आयोग के नवीनतम आदेश 19.04.2017 को देखा जा सकता है।हिंदी और अंग्रेजी में कन्नौज अपहरण कांड के पूरे घटनाक्रम को जानने के लिए वीपीआई वेबसाइट का यह लिंक देखें- http://votersparty.in/kannauj-kidnap-case-history/ कन्नौज अपहरण कांड से संबंधित मीडिया में समाचार आते रहे हैं किंतु रिपोर्टिंग में कुछ तथ्यात्मक त्रुटियां देखने को मिली है। इन त्रुटियों के साथ उनका संशोधित तथ्य का विवरण इस विज्ञप्ति के साथ संलग्न 1 के रूप में  संलग्न है।राजनीति के अपराधीकरण को दूर करने के लिए किए गए श्री भरत गांधी के संघर्षों का इतिहास इस विज्ञप्ति के साथ संलग्नक 2 के रूप में संलग्न है। भरत गांधी की सुरक्षा पर खतरे के संबंध में पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट हिंदी में देखने के लिए यह लिंक क्लिक करें http://votersparty.in/bharat-gandhi-2/

(हुकुम सिंह)

प्रदेश अध्यक्ष, वीपीआई

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल

 

 

 

 

अखिलेश हो सकते हैं गिरफ्तार

राजनीतिक दर्शन पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक, राजनीति सुधारक और वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के मुखिया श्री भरत गांधी के पांच साल के संघर्ष के बाद मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव, उनके सहयोगियों, डीजीपी कार्यालय के उच्चस्थ अधिकारियों पर लगे अपहरण, प्रताड़ना, गैग रेप के झूठे मुकदमों आदि की साजिश रचने जैसे आरोपों पर सीबीसीआईडी से जांच करने करने के लिये उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने गत आदेश दिनांक- 24 फरवरी, 2016 को निर्देश दिया था। चूंकि केस में मुख्यमंत्री मुख्य आरोपी थे इसलिये उन्होने आयोग के निर्देश का अनुपालन नही होने दिया। अपने आदेश का अनुपालन न किये जाने पर क्षुब्ध होकर आयोग ने अपने ताजा आदेश दिनांक-04.03.2017 द्वारा प्रमुख सचिव गृह को सम्मन भेज दिया है। सम्मन में आयोग ने कहा है कि आयोग के गत आदेश दिनांक- 24 फरवरी, 2016 का परिपालन सुनिश्चित करते हुये लगातार हो रहे जानलेवा हमलों के शिकार श्री भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा दिया जाये व आपराधिक घटनाओं की जांच सीबीसीआईडी से कराके रिपोर्ट 6 सप्ताह के अंदर आयोग को सौंपी जाये। यदि ऐसा न किया गया तो अपनी प्रकिया के अनुसार आयोग अपने अगले आदेश में उत्तर प्रदेश के गृह सचिव को गिरफ्तार करने का वारंट जारी कर देगा।

सन् 2013 में दर्ज केस संख्या- 40582/24/48/2013 पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेश दिनांक- 24 फरवरी, 2016 में कहा था कि उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह लगातार हो रहे जानलेवा हमलों के शिकार याचिकाकर्ता श्री भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा दिया दें व आपराधिक घटनाओं की जांच सीबीसीआईडी से कराके रिपोर्ट 6 सप्ताह के अंदर आयोग को सौंपें और श्री भरत गांधी के विविध प्रत्यावेदनों में अंकित शिकायतों की जांच प्रदेश की जांच एजेंसी सीबीसीआईडी से करवा के रिपोर्ट 6 सप्ताह के अंदर आयोग के विचारार्थ प्रस्तुत करें। उत्तर प्रदेश राज्य की सीबीसीआईडी ने आयोग को अपने पत्र दिनांक- 09 सिंतम्बर, 2016 के माध्यम से सूचित किया कि उसे जांच करने के लिये आयोग से और केन्द्रीय गृह मंत्रालय से आदेश प्राप्त हुआ है। इन आदेशों के अनुपालनार्थ प्रदेश की जांच एजेन्सी ने प्रमुख सचिव(गृह) को चार बार पत्र भेजकर जांच करने की अनुमति मांगी है। सीबीसीआईडी ने आयोग को आगे की जानकारी देते हुये कहा है कि प्रदेश सरकार से जांच की अनुमति न मिल पाने के कारण नियमानुसार जांच एजेंसी जांच शुरू नहीं कर सकी है। सीबीसीआईडी का पत्र, आयोग के गत आदेश की प्रति, जिस पर आयोग ने ताजा आदेश में गृह सविच को सम्मन जारी किया है, इस रपट के साथ संलग्न है। इस आदेश को आयोग की वेबसाइट www.nhrc.nic.in के होम पेज देख सकते हैं। श्री गांधी से संपर्क करने के लिये फोन- 096 96 1 2 3 4 5 6 पर बात भी किया जा सकता है। हिन्दी क्रुतिदेव व यूनीकोड में प्रस्तुत विस्तृत जानकारी के लिये डाउनलोड करें, इस ईमेल का अटैचमेंट। पढ़िये पूरी कहानी……..

अपराध के जरिये राजनीति का रास्ता नही छोड़ा है अखिलेश यादव ने। मीडिया में बनी उनकी छवि झूठ साबित हुई है। भारत की राजनीति एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जिसमें यह तय होना है कि राजनीति और अपराध अलग हो पायेंगे या नही? आम आदमी के नाम पर बनी पार्टी को लेकर जिस तरह का उत्साह मीडिया में व जनता में देखा गया, उससे लगा था कि शायद भ्रष्टाचार व अपराध से अब भारत की राजनीति का दामन छूट जायेगा। किन्तु ऐसा होता नही दिख रहा है। इस पार्टी के ज्यादातर विधायकों पर आपराधिक मुकदमें कायम हो चुके हैं।

अपराध को संरक्षण देने के लिये देश में जिस नेता को सबसे ज्यादा बदनामी मिली, वह हैं- उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव। जब उन्होने अपने पुत्र अखिलेश यादव को सत्ता की बागडोर सौंपी, तो बहुत से लोगों को लगा कि विदेश में पढ़ा-लिखा ये युवक अपने पिता के रास्ते पर न चल कर उ. प्र. को एक ताजी व शीतल राजनीति देगा। मीडिया द्वारा ऐसी छवि खासकरके उस समय बनायी भी गई जब उनका मुकाबला अपने चाचा श्री शिवपाल यादव से हुआ। मीडिया ने समाचारों को इकतरफा इस प्रकार से पेश किया जिससे यह भ्रम बना कि समाजवादी पार्टी को अखिलेश यादव अपराध से मुक्त करना चाहते हैं और उनके चाचा श्री शिववपाल यादव अपराधियों के संरक्षक बने रहना चाहते हैं।

किन्तु जून 2012 में सम्पन्न हुये कन्नौज उपचुनाव को जिस तरीके से मुलायम सिंह की पुत्रवधू डिम्पल यादव ने जीता, उससे अखिलेश यादव की ओर आस लगाये बैठे लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। कन्नौज की यह अपराध गाथा वैसे तो समाचार पत्रों में कभी-कभी राष्ट्रीय खबर बनती रही है और राजनीति के आपराधीकरण का एक नया आयाम पेश करती है। प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के संरक्षण में चल रही अपराध गाथा पर सारी मीडिया मौन रही है, शायद उसलिये कि वह मुख्यमंत्रा के पद पर विराजमान रहे थे। इस रपट में कन्नौज अपहरण काण्ड की पूरी कहानी इसलिये दी जा रही है कि जिससे सुधी पाठक यह जान सकें कि देश में राजनीति के आपराधीकरण के लिये वास्तव में जिम्मेदार कौन है?

कानूनी व संवैधानिक सुधारों पर दर्जनों पुस्तकों के लेखक और वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के प्रमुख श्री भरत गांधी कहते हैं कि उन्हांने उक्त उपचुनाव 2012 के 6 साल पहले से अमेठी, रायबरेली व कन्नौज जैसे वीआईपी लोगों के चुनाव क्षेत्रों को काम करने के लिये चुना। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों को इसलिये चुना गया क्योंकि यहां से देश के बड़े दलों का नेतृत्व करने वाले लोग चुनाव लड़ते हैं। श्री गांधी का आकलन था कि इन क्षेत्रों की जनता को समझाने का मतलब होता है, बड़ी पार्टियों के प्रमुखों की सोच में बदलाव लाना। उनका यह भी निष्कर्ष था कि बड़ी पार्टियों के प्रमुखों की सोच में बदलाव का मतलब होता है देश की राजनीतिक चेतना में बदलाव। श्री भरत गांधी और उनके साथियों को उम्मीद थी कि जल-जंगल-जमीन जैसे प्राकृतिक साधनों व मशीन के कारण पैदा हुये साझे धन में देश के वोटरों को हिस्सा दिलाने वाला संसद में 137 सांसदों द्वारा पेश वोटरशिप का जो प्रस्ताव कानून का दर्जा नहीं ले पाया, उसे शायद देश के ‘‘वी. आई. पी. क्षेत्रों’’ की जनता को समझाने से कानून का दर्जा मिल जाये।

जब संसद में वोटरशिप का प्रस्ताव आने से बलात् रोक दिया गया, तो राजनीति सुधारने के वोटरशिप सहित तमाम एजेण्डों पर काम करने के लिये उस समय एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन किया गया। इस पार्टी का नाम रखा गया- वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल(वीपीआई)। इस पार्टी के बैनर तले अमेठी व रायबरेली में बड़े पैमाने पर जनता का ध्रुवीकरण हुआ। वहां कोई विशेष घटना नहीं घटी। किन्तु अखिलेश यादव के क्षेत्र कन्नौज में काम करना इतना आसान साबित नहीं हुआ।

हुआ यह कि वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल, वीपीआई ने संसद में पेश राजनीतिक सुधारों की योजना की ओर लोगों का ध्यान खींचने के उद्देश्य से कन्नौज लोकसभा के उप चुनाव 2012 में अपना प्रत्याशी खड़ा करने का फैसला किया। इस फैसले से पहले वह कहते हैं कि सभी बड़े दलों से संपर्क किया गया व उनसे उप चुनाव में प्रत्याशी न उतारने का आग्रह किया गया। उनका दावा है कि उनकी बातों पर कांग्रेस, बी. जे. पी. व बसपा जैसे दलों ने कन्नौज उप चुनाव में प्रत्यशी  न उतारने का आग्रह मान लिया। परिणामस्वरूप चुनाव केवल समाजवादी पार्टी व वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के बीच हो गया। चुनाव की घोषणा होते ही सपा हरकत में आ गई और चुनाव लड़ने के लिये कन्नैज कलेक्ट्रेट जाने वाले सभी लगभग 83 लोगों का बन्दूक की नोक पर अपहरण कर लिया गया और चुनाव नही होने दिया गया। मीडिया में ये पूरी कहानी नही आई। केवल यह खबर आई कि ‘‘मुख्यमंत्री की पत्नी डिम्पल यादव कन्नौज से निर्विरोध सांसद बन गईं, उनके खिलाफ किसी ने पर्चा ही नही भरा’’।

वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के अलावा अपहरण का शिकार किसी भी पार्टी व प्रत्यासी ने इस जुर्म के खिलाफ आवाज नही उठाई। किन्तु इस नयी पार्टी ने हिम्मत दिखाते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में डिम्पल के चुनाव के खिलाफ चुनाव याचिका दायर करके चुनाव की वैधता को चुनौती दी। न्यायालय ने लगभग चार महीने तक बड़ी सक्रियता दिखाई। किन्तु जब डिम्पल यादव काफी मशक्कत के बाद न्यायालय में पेश हुई, तो हर सप्ताह सुनवाई में चल रही केस की अचानक सुनवाई लगभग डेढ़ साल तक के लिये बंद हो गई। इस अवधि में डिम्पल यादव का संसदीय कार्यकाल पूरा हो गया और लोकसभा के गत वर्ष हुये चुनाव में फिर से जीता हुआ घोषित कर दिया गया। राजनीति की सफाई के लिये काम कर रहे श्री भरत गांधी कहते हैं की इस बार वास्तव में चुनाव मोदी लहर में भाजपा के प्रत्यासी श्री सुब्रत पाठक ने जीत लिया था। किन्तु मतगणना रोक कर अचानक निर्वाचन अधिकारी ने चमत्कारिक ढ़ग से डिम्पल यादव को विजयी घोषित कर दिया। कथित रूप से विजयी घोषित होने के बाद हाई कोर्ट इलाहाबाद ने डिम्पल यादव के खिलाफ पेश चुनाव याचिका की अचानक फिर से सुनवाई शुरू कर दी और 23 जुलाई 2012 को दाखिल वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल की चुनाव याचिका संख्या 19/2012 को तकनीकी आधार पर बिना ट्रायल के दिनांक 03.09.2014 को खारिज कर दिया। हांलाकि खारिज करते वक्त भी अपहरण की घटना को उच्च न्ययालय ने नहीं नकारा।

चुनाव रोकने के लिये किये गये सामूहिक अपहरण काण्ड की जानकारी चुनाव आयोग को 6 जून 2012 को ही दे दी गयी थी। आयोग ने अपहरण अभियान की संरक्षिका कन्नौज के तत्कालीन कलेक्टर से रपट मांगी। कलेक्टर यानी निर्वाचन अधिकारी सिल्वा कुमारी जे. ने लिखकर भेजा कि ‘‘कलेक्टेट के आसपास के दुकानदारों से अपहरण के बारे में पूंछा गया तो उन्होने बताया कि अपहरण नही हुआ’’। चुनाव आयोग ने आरोपी से रपट मांगा व उसकी रपट को स्वीकार करके निष्पक्ष जांच की जरूरत नही समझा। इससे इस बात की प्रबल संभावना है ि कइस अपहरण काण्ड को अंजाम देने के लिये केवल जिलाधिकारी, प्रदेश निर्वाचन अधिकारी को ही विष्वास में नलहीं लियो गया था भारत के निर्वाचन आयोग को भी ‘‘साधा’’ गया था। आयोग अकादमिक स्तर पर राजनीति का अपराधीकरण राकने के तमाम कसीदे पढ़ता है, लेकिन जब अपराधियों पर कार्यवाही करने का मौका आता है तो इसी तरह का बर्ताव करता है, जैसा उपरोक्त कहानी में बताया गया। इस पूरी परिघटना में चुनाव आयोग की भूमिका की जांच करें तो इस निष्कर्ष को नकारा नही जा सकता है कि ‘‘चुनाव मे प्रत्यासियों का अपहरण करके चुनाव को बलात् निर्विरोध घोषित करवाने में चुनाव आयोग को विष्वास में लिया गया था’’।

सामूहिक अपहरण काण्ड के जरिये मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी को संसद भवन के अंदर पंहुचाकर ‘‘माननीय सांसद’’ बना दिया। अजीब बात है कि जहां राष्ट्रपति का चुनाव भी निर्विरोध नही होता वहां सांसद का चुनाव निविरोध हो गया। रिष्वत लेकर प्रचारित मीडिया की इस झूठी खबर पर लोगों ने आसानी से यकीन कर लिया। सामूहिक अपहरण काण्ड की पूरी जानकारी केन्द्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार सिंदे को दिया गया। भारत सरकार के गृह सचिव को लगभग एक दर्जन पत्र भेजकर अपहरणकर्ताओं के खिलाफ भेजी गई शिकायत दिनांक 21 जून 2012 पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई। गृह सचिव ने कार्यवाही करने की बजाय ‘‘कानून व्यवस्था राज्य का मामला है’’-इस तर्क पर सभी प्रत्यावेदनों को उत्तर प्रदेश के उसी गृह सचिव भेज दिया, जो अपहरण के मुख्य आरोपी तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के अधीन काम करता था। इस तरह देश व प्रदेश के गृह सचिवों को भेजे गये सभी प्रत्यावेदन सामूहिक अपहरण काण्ड के आरोपी मुख्यमंत्री की टेबल पर कार्यवाही करने के लिये पंहुच गये। जिनपर गत गत पांच सालों में कुछ नही हुआ। सूचना के अधिकार से की गई कार्यवाही की मांग करने वाले कृष्णानन्द शास्त्री को पिस्तौल से डरा के चुप करा दिया गया।

वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के संस्थापक व पार्टी के ‘नीति निर्देशक’ श्री भरत गांधी को व मुक्ष्यमंत्रा की पत्नी श्रीमती िउम्पल यादव के सामने उतारे गये इस पार्टी के प्रत्यासी श्री प्रभात पाण्डेय को जब धमकिया मिलने लगीं, तो भरत गांधी ने सुप्रीम कोर्ट. में मुकदमा दायर करके पुलिस सुरक्षा दिये जाने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को दो बार स्थगित किया गया। तीसरी बार सुनवाई हुई तो न्यायाधीश चंद्रमौली कुमार प्रसाद की बेंच ने श्री भरत गांधी के तर्कों को सुना। न्यायालय ने श्री भरत गांधी द्वारा सीबीआई जांच के लिये दी गई दलीलों को नहीं माना। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने प्रत्यक्ष प्रमाण को भी नजरंदाज किया। देश के सबसे बड़े न्यायालय के इस फैसले को अपराधियों ने अपराध करने का सर्वोच्च न्यायालय से मिला लाइसेंस माना।

केन्द्र व राज्य के गृह सचिवों की चुप्पी पर सर्वोच्च न्यायालय ने चुप्पी साध लिया। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले दिनांक-22 जनवरी 2013 में लिखा कि -‘‘कोर्ट क्रिमिनल रिट में की गई प्रार्थना से सहमत नही है। जहां तक याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा की बात है कोर्ट याचिकाकर्ता को सलाह देती है कि वे नये सिरे से उ.प्र. के पुलिस महानिदेशक के कार्यालय में सुरक्षा के लिये प्रत्यावेदन लगायें। पुलिस महानिदेशक खतरे की जांच करके नियमानुसार सुरक्षा देगे। किन्तु इसका यह मतलब नही समझा जाना चाहिये कि कोर्ट याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा देने का आदेश दे रही है।’’

सुप्रीम कोर्ट अपहरणकर्ताओं के खिलाफ किसी भी तरह की जांच करने व एफ. आई. आर. दर्ज करने के सवाल पर चुप्पी साध गया। परिणामस्वरूप अपराधियों के मनोबल बढ़ गये व अपराधों की लड़ी लग गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भाषा का फायदा उठाते हुये तत्कालीन पुलिस महानिदेशक श्री देवराज नागर ने आदेश को गंभीरता से न लेते हुये जांच के नाम पर लीपा-पोती कर दी और मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द के गुण्डों से घिरे याचिकाकर्ताओं को सुलिस सुरक्षा देने से मना कर दिया। इस प्रकार श्री अखिलेश यादव ने उच्चस्थ अधिकारियों के सहयोग से सुप्रीम कार्ट के आदेश को भी धता बता दिया।

हाई कोर्ट इलाहाबाद व सुप्रीम कोर्ट के उक्त इस आदेशों से समाज में ये संदेश गया कि ‘‘राजनीति में अपराध के जरिये चुनाव जीत लेना व संसद सदस्य बन जाना एक साधारण बात है। राजनीतिक अपराधियों को सजा दिलाने में कोर्ट का कीमती समय बर्बाद करना उचित नही है। राजनीतिक अपराधियों को सजा दिलाने का काम करने वाले लोगों की सुरक्षा भी बहुत कीमती चीज नही है। सत्तासीन मुख्यमंत्रीगण को अपराध को संरक्षण देने का अघोषित अधिकार है।’’ हाई कोर्ट इलाहाबाद व सुप्रीम कोर्ट के उक्त इस आदेशों से लोगों की ये धारणा भी मजबूत हुई कि ‘‘समरथ को नहि दोष गोसाईं’’, ‘‘ताकतवर लोगों का कुछ नही बिगड़ता भाई!’’, ‘‘अदालतें सफेद हाथी हैं। इनके वश का कुछ भी नही है’’। ‘‘अदालतें केवल कुछ लोगों को रोजगार देने का जरिया भर हैं’’।

यह आशंका निराधार नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट. के आदेश पर भरत गांधी व उनकी पार्टी के प्रत्यासी को पुलिस सुरक्षा देने पर डीजीपी देव राज नागर ने नियमानुसार जांच नहीं की और सुरक्षा देने से मना कर दिया। जब सूचना के अधिकर के तहत जांच की रपट मांगी गई तो सूचना देने से मना कर दिया। जब पुलिस महानिदेशक के विरुद्ध राज्य सूचना आयेग में अपील की गई तो के आयोग के चेयरमैन जावेद उस्मानी ने दिनांक-25 जून 2015 के आदेश के सहारे डीजीपी को सूचना देने से छूट देकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निरर्थक बना दिया। तब तक इतनी देर हो चुकी थी कि पुलिस महानिदेशक डीजीपी देव राज नागर रिटायर्ड हो गये और उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट अवमानना का मुकदमा भी दायर नही किया जा सकता था।

तुम डाल-डाल, तो हम पात-पात-इस तरीके से काम कर रहे वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के लोगों ने भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पीछा नहीं छोड़ा। अब पार्टी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में प्रत्यावेदन दिनांक-11.11.2013 लगाया। आयोग ने मामले में संज्ञान ले लिया और भारत सरकार के गृह सचिव को, उ. प्र. तथा असम प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर दिया। असम के पुलिस महानिदेशक ने बोड़ो आतंकवादियों के खतरे के मद्देनजर भरत गांधी को असम प्रवास के दौरान 24 घंटे पुलिस स्कार्ट देने की बात अपने पत्र दिनांक- 11.06.2015 द्वारा स्वीकार कर लिया।

श्री भरत गांधी की केस में पारित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेश दिनांक-3 मार्च 2015 पर डीजीपी. ने उ. प्र. के आरोपी मुख्यमंत्री के करीबी व इटावा के उप पुलिस अधीक्षक रह चुके िऋषिपाल यादव को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया। इस जांच अधिकारी ने जांच करने की बजाय आरोपी के आपराधिक सहयोगी की तरह जांच के नाम पर लीपापोती किया। यहां तक कि जबरदस्ती गवाही लेने के लिये हथियारबंद अपराधियों को लेकर गवाहों के घर पंहुच गया।

िऋषिपाल यादव को जांच अधिकारी नियुक्त होने के बाद व इस जांच अधिकारी के समक्ष गवाही देने के बाद शिकायतकर्ता प्रभात पाण्डेय का 27 अप्रैल को अमेठी से अपहरण हो गया। बंदूक की नोक पर सैकडों सादे पेपरों पर दस्तखत करवा लिये गये। अपहरणकर्ताओं का पता लगाने के लिये श्री भरत गांधी ने प्रदेश के मुख्य सचिव को 5 मई 2015 को प्रत्यावेदन देकर सीबीआई जांच या न्यायिक आयोग के गठन की मांग किया। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने प्रदेश के गृह सविच को कार्यवाही का आदेश देते हुये मामला गृह सचिव देबाशीष पाण्डा के पास भेज दिया।

गत 20 मई 2015 को भरत गांधी ने प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक से मिलकर पूरा वाकया बताया और सरकार से मामले में रपट मांगने की प्रार्थना किया। राज्यपाल की ओर से कोई कार्यवाही हुई या नही, इस विषय में राज भवन ने कोई जानकारी नही दिया। राज्यपाल राम नाइक जी की दवि ये है ि क वह गलत बात बर्दास्त नही करते। फिर भी राज्यपाल की चुप्पी यह बताती है कि राजव्यवस्था पूरी तरह सड़ गल चुकी है।

अपने लोकप्रिय प्रवचनों द्वारा कई हजार लोगं को राजनीतिक सुधार का प्रखर प्रवक्ता बना चुके श्री भरत गांधी कहते है कि कानूनी कार्यवाही का सामना करते-करते जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आजिज आ गये तो उन्होंने भरत गांधी का अपहरण करने के लिये टाटा सफारी व फार्चूनर गाड़ियों में अपराधियों को उनके लखनऊ निवास पर 4 जुलाई 2015 दोपहर 1 बजे भेजा। दिल्ली में होने के कारण भरत गांधी उनके हत्थे चढ़ने से बच गये। इस घटना पर पुलिस महानिदेशक के पास लिखित शिकायत की गई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज नही किया। इसके बाद श्री गांधी ने प्रदेश के मुख्य सचिव को दिनांक 08 जुलाई 2015 को प्रत्यावेदन भेजकर अपने खिलाफ भेजे गये अपराधियों को पकड़ने व मुकदमा चलाने के लिये सी. बी. आई. तैनात करेन की मांग किया। प्रत्यावेदन की प्रतियों को कार्यवाही करने के लिये भारत सरकार के गृह सचिव, उ. प्र. के राज्यपाल और पुलिस महानिदेशक व दिल्ली के पुलिस कमिष्नर को भी भेजा गया। अपराधियों को पकड़ने की तो बात ही छोड़िये, कोई भी अधिकारी प्राथमिकी दर्ज करने की हिम्मत भी नही जुटा पाया।

इसका परिणाम यह हुआ कि अपराधियों का मनोबल और बढ़ गया। दो गाड़ियों में भरकर आये अपराधियों ने 31 जनवरी 2016 की रात में उस समय श्री भरत गांधी पर फिर से हमला किया, जब श्री भरत गांधी कन्नौज में आयोजित जनसभा को संबोधित करके अपनी कार से लखनऊ जा रहे थे। तमाम प्रत्यावेदनों के वावजूद फिर से आपराधियों के खिलाफ मुकदमा तक नही लिखा गया। भारत सरकार के मुख्य सचिव, उ. प्र. के राज्यपाल और पुलिस महानिदेशक सभी ने चुप्पी साध ली।

राजनीति शास्त्रा पर समकालीन चिंतक श्री भरत गांधी का कहना है कि चष्मदीद लोगों की नजरों के सामने कन्नौज में लगभग प्रदेश भर से बुलाकर 800 सशस्त्र अपराधियों को मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले लोगों का अपहरण करने के लिये लगाया गया था। सबने मोबाइल पर आपसे मे बात की थी। भरत गांधी ने अपहरणकर्ताओं के मास्टर माइण्ड नवाब सिंह यादव का मोबाइल नम्बर देते हुये तीन साल तक लगातार मांग किया कि कॉल रिकार्ड देखकर सभी 800 अपहर्ताओ को पकड़ा जाये। किन्तु आज तक किसी एजेन्सी ने काल रिकार्ड की परीक्षा नहीं की।

उ. प्र. के 800 अपराधियों को कौन बचा रहा है? क्या केन्द्र में सत्तासीन भाजपा सरकार सी बी. आई. लगाकर अपराधियों का जखीरा प्रदेश से उखाड़ नही सकती? आखिर सी बी. आई. लगाने की श्री भरत गांधी की बात को नकार के क्या केन्द्र की भाजपा सरकार प्रदेश की सपा सरकार के अपराधियों की सुरक्षा नहीं कर रही है? यदि ऐसा ही है तो क्या भाजपा चाहती है कि सपा का जंगलराज चलता रहे और जंगलराज का नाम लेकर भाजपा लोगों से हर पांच साल में जनता से वोट मांगती रहे।

मुख्यमंत्री पर अपराधों की साजिश रचने व अपराधियों को संरक्षण देने का जो आरोप लगा है, उस पर पुलिस थाने तो छोड़िये, स्वयं पुलिस महानिदेशक ने भी चुप्पी साध रखी है। अब तो आरोप स्वयं पुलिस महानिदेशक पर लगने लगे हैं। क्योंकि मानवाधिकर आयोग अपने आदेश दिनांक- 16.10.2015 द्वारा मांगे जाने पर भी पुलिस महानिदेशक ने श्री भरत गांधी की सुरक्षा पर तैयार किये गये जांच रपट को आयोग के अवलोकनार्थ नही भेजा और दो साल से छिपा कर रखा है। श्री भरत गांधी के लखनऊ आवास पर हमला करने वाली कार का नम्बर देने के बाद भी पुलिस महानिदेशक ने इस कार के मालिक का ब्योरा आयोग को नही भेजा। इसके विपरीत डिजिटल रजिस्टर से इस कार का पंजीकरण ही मिटा दिया गया। अमेठी के एडवोकेट प्रभात पाण्डेय व उनके लिये पैरबी करने वाले उनके पड़ोसी श्री लालजी वर्मा के खिलाफ रेप का झूठा मुकदमा पुलिस महानिदेशक और अखिलेश सरकार के मंत्री श्री गायत्री प्रजापति जो अब जेल में हैं, के निर्देष पर ही लिखवाया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव श्री भरत गांधी को जीवित छोड़ने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते थे। उन्हांने श्री भरत गांधी का अपहरण व हत्या करने के इरादे से दो गाड़ियों में भरकर अपने पालतू अपराधियों को 7 जुलाई, 2015 को श्री भरत गांधी के लखनउ निवास पर भेजा। इस मामले में पुलिस में षिकायत दर्ज कराई गई, किन्तु मुकदमा नही लिखने दिया गया। इसके बाद 15 नवम्बर, 2016 को जब किसी तरह पता चला कि श्री भरत गांधी इस समय लखनउ में मौजूद हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनको उनके निवास से दोबारा अपहरण या हत्या का प्रयास करवाया। इस बार अपराधियों ने देखा कि मकान की छत पर बैठा कोई व्यक्ति कैमरे से संदिग्ध लोगों की गतिविधियों की रिकार्डिंग कर रहा है, खतरे को भांप कर अपराधी वापस चले गये।

मजेदार बात तो ये है कि उक्त सारी बातें श्री भरत गांधी ने अपनी बहस के दौरान सुप्रीम कोर्ट को गत 22 फरवरी, 2016 को अपनी दूसरी बहस के दौरान बताया और न्यायालय से केन्द्रीय बलों की सुरक्षा देने की मांग की। न्यायालय जो अक्सर राजनीति के अपराधीकरण पर टिप्पड़ियां करता रहता है, ने कहा कि तीन साल पुरानी याचिका पर फिर से अदालत कोई आदेश जारी नही कर सकती।

जब गवाहो के अपहरण, उनको डराने धमकाने व बंदूक की नोक पर बयान लेने श्री भरत गांधी की कार पर हमला करने की घटनाओं को माननीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में लाया गया तो आयोग ने गत 24 फरवरी 2016 को दूसरा आदेश देते हुये श्री भरत गांधी के जीवन पर समाजवादी पार्टी के गुण्डों से खतरा महसूस किया और प्रमुख सचिव गृह श्री देवाशीश पाण्डा को आदेश देते हुये कहा कि शिकायतकर्ता श्री भरत गांधी को और लखनऊ में रह रहे उनके परिवारजन को पुलिस सुरक्षा दिया जाये साथ ही साथ अब मामले की जांच सी. आई. डी. से कराके आयोग को 6 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपा जाये। जांच के लिये श्री भरत गांधी ने गवाहो के लिखित बयानों सहित आपराधिक घटनाओं का बिंदुवार ब्योरा अपने आवेदन दिनांक- 12 मार्च, 2016 और 11 अप्रैल, 2016 के आवेदनों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की सी. आई. डी. को भेजा। किन्तु एक बार फिर कोई कार्यवाही नही होने दी गई।

अप्रैल, 2016 के बाद भेजे गये अपने आवेदनों के माध्यम से श्री भरत गांधी ने मानीय मानवाधिकार आयोग को बताया कि प्रदेश की अखिलेश सरकार ने आयोग के आदेश का उसी तरह उल्लंघन कर दिया है जिस तरह अखिलेश सरकार ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन सन् 2013 में किया था। श्री भरत गांधी की बातों को सही बताते हुये सी. आई. डी. उत्तर प्रदेश ने आयोग को भेजे गए अपने 9 सितम्बर, 2016 के पत्र में कहा है कि माननीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जांच करने संबंधी आदेश सी. आई. डी. को प्राप्त हुए हैं और प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह से जांच करने की अनुमति चार बार मांगी गई किंतु जांच की अनुमति सरकार ने नहीं दी।

श्री भरत गांधी और सी. आई. डी. उत्तर प्रदेश के पत्रों पर संज्ञान लेते हुये माननीय आयोग ने अपने नए आदेश अप्रैल, 2017 में प्रदेश के प्रमुख गृह सचिव श्री देवाशीश पांडा को सम्मन भेजा है। अब गृह सचिव को श्री भरत गांधी की केस में पारित गत आदेश 24 फरवरी 2016 का अनुपालन करने के तहत श्री भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराना होगा; सी. आई. डी. को जांच करने की अनुमति देनी होगी और जांच की रिपोर्ट 6 सप्ताह के भीतर आयोग को भेजना होगा। यदि गृह सचिव फिर से अखिलेश यादव और उनके आपराधिक गिरोह को बचाने की कोशिश करते हैं और आयोग के आदेश का अनुपालन करने में हीलाहवाली करते हैं तो आयोग की प्रक्रिया के तहत आयोग अपने अगले आदेश में प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को गिरफ्तार करके आयोग के समक्ष पेश करने के लिए वारंट जारी करेगा।

किन्तु वारंट की नौबत आती हुई नही दिख रही है क्योंकि अब प्रदेश में सरकार बदल चुकी है। नये मुख्यमंत्री प्रदेश में अपराधियों की सफाई का अभियान चला रहे हैं। वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल (वीपीआई) के मुखिया श्री भरत गांधी के केस में पारित माननीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का आदेश मुख्यमंत्री के अपराध निवारण के काम में सहयोगी ही साबित होगा, क्योंकि इससे समाजवादी पार्टी के प्रदेश भर के लगभग 800 अपराधियों के पकडे़ जाने की संभावना है।

श्री अखिलेश यादव पर यह मुकदमा जाने-माने राजनीति सुधारक व दर्जनों पुस्तकों के लेखक व वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के मुखिया श्री भरत गांधी ने राजनीति से अपराध खत्म करने की अपनी मुहिम के तहत दायर किया है। इसके पहले उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी मुकदमा किया है उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इसी मामले में दो बार बहस भी कर चुके हैं। आयोग के गत आदेश दिनांक- 24.02.2016 और इसी के अनुपालन के लिये जारी ताजा आदेश 05.04.2017 की संलग्न। प्रति विस्तृत जानकारी- अवजमतेचंतजलण्पदधंददंनरापकदंचांदक

सवाल उठता है कि आखिर उच्च स्तरीय लोगों के अपराधों पर कानून की सारी मषीनरी हैंग क्यों हो जाती है? इसकी वजह क्या है? इसके लिये जिम्मेदार कौन है? क्या हाई कोर्ट, जिसने चस्मदीद गवाहों को अदालत तक पंहुंचने नही दिया और चुनाव याचिका रद्द कर दी? क्या सुप्रीम कोर्ट, जिसने बिना कारण बताये सी. बी. आई. जांच कराने से मना कर दिया और राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिये संघर्षरत श्री भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा देने के बारे में जानबूझ कर लचर भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे पुलिस महानिदेशक उस भाषा का दुरुपयोग करके भरत गांधी पर जान के खतरे का भय बनाये रख सकें? क्या संघीय गृह मंत्रालय के अधिकारी, जिन्होने रामदेव, शीजलवाड़, संगीत सोम, पप्पू यादव को तो सुरक्षा दे दिया, लेकिन श्री भरत गांधी के मामले को बार-बार उत्तर प्रदेश के उसी दफ्तर में भेजा, जिनकी वजह से श्री गांधी की जान को खतरा पैदा हुआ? क्या उत्तर प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त श्री जावेद उस्मानी, जिन्होंने अपना फैसला देते वक्त पुलिस महानिदेशक के उस गैर कानूनी आदेश पर चुप्पी साध लिया जिसमें श्री भरत गांधी को पुलिस महानिदेशक ने उनकी अपनी सुरक्षा पर किये गये जांच रिपोर्ट को देने से मना कर दिया था।

उच्च स्तरीय लोगों के अपराधों पर कानून की सारी मषीनरी हैंग क्यों हो जाती है व राजनीति के क्षेत्र का अपराध रुकता क्यों नही? आखिर इसके लिये जिम्मेदार कौन है? क्या अपराध की सीढ़ी पर चढ़कर सत्ता के षिखर पर विराजमान नेता, जो पालतू अपराधियों द्वारा अपराध करवाते हैं, पुलिस महानिदेशक से उन अपराधियों को संरक्षण दिलवाते हैं और राजनीतिक अपराधियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने वालों के खिलाफ झूठे मुकदमें लिखवाकर उन्हें जेल भेजवाते है? क्या भारत का चुनाव आयेग, जो सब कुछ जानते हुये भी मुख्यमंत्री की पत्नी श्रीमती डिम्पल यादव को अपराध के सहारे निर्विरोध सांसद बनने का केवल मौका ही नहीं दिया, अपितु कन्नौज से निर्विरोध चुनाव जीतने का झूठा प्रमाणपत्र देने वाले जिला अधिकारी का बचाव भी करता रहा। क्या कानून, जो पुलिस को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के अधीन रखते हैं?

कन्नौज अपहरण काण्ड और उसके खिलाफ लड़ी गई कानूनी जंग से साफ पता चलता है कि राजनीति के अपराध के लिये केवल नेता जिम्मेदार नही हैं। देश-प्रदेश के गृह मंत्रालयों के आई. ए. एस. व आई. पी. एस. अधिकारी, प्रदेशों के पुलिय महानिदेशकों के कार्यालय, चुनाव आयोग, हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट भी उतने ही जिम्मेदार हैं। इससे आगे बढ़कर अपनी जान हथेली पर लेकर अपराध के खिलाफ संघर्ष कर रहे श्री भरत गांधी राजनीति के अपराधीकरण के लिये उक्त संस्थाओं के अलावा जनप्रतिनिधित्व कानून व लोकतंत्र की वर्तमान परिभाषा को भी जिम्म्ेदार मानते हैं और अपराध के खिलाफ एक बड़ी मुहिम छेड़ने की जरूरत बताते हैं। उनका यह भी कहना है कि चूंकि मीडिया की नई तकनीकि आ जाने के कारण किसी भी तरह की मुहिम अब केवल कारपोरेट संचालित मीडिया ही चला सकती है। अतः यदि अपराध के खिलाफ देश में कोई मुहिम नहीं चल रही है तो इसका सीधा सा अर्थ है कि देश विदेश के कारपोरेट घराने राजनीति के अपराधीकरण को अपनी आमदनी का जरिया समझते हैं।

फिलहॉल, संवैधानिक एजेन्सियों द्वारा की जा रही अपहर्ताओं की सुरक्षा से संदेश. जाता है कि राजनीति का अपराधी सुरक्षित है। राजनीति केवल अपराधियों के लिये है। जो अपराध नही कर सकता, वह चुनाव लड़ नही सकता। चुनाव में दूसरी पार्टियों के अपराधियों का सामना किसी भी पार्टी का सज्जन कार्यकर्ता नहीं कर सकता है? इसलिये पार्टियों के सामने अपराधियों को ही टिकट देने के सिवा कोई विकल्प नही है। इस परिस्थिति को तभी बदला जा सकता है जब राजनीति के अपराधीरिण के खिलाफ केवल बोला ही न जाय, अपितु कुछ किया भी जाये। कम से कम श्री भरत गांधी जैसे लोग कुछ कर रहे हैं तो उनका हर संभव सहयोग किया जाये। चुप्पी केवल भरत गांधी के लिये ही नही, सबके लिये घातक है।

रिपोर्टर- जयपाल जेहरा, पीयूसीएल, दिल्ली,

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एजेंसी ने रिकॉर्ड किया वीपीआई प्रमुख भरत गांधी का बयान

उ. प्र. प्रदेश सरकार की मंजूरी मिलते ही कन्नौज अपहरण कांड में सीबीसीआईडी ने जांच शुरु कर दी है। सी.बी. सी.आई.डी. ने सबसे पहले याचिकाकर्ता और वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल (वीपीआई) प्रमुख भरत गांधी का बयान जानकीपुरम विस्तार लखनऊ में उनके आवास पर रिकॉर्ड किया। अपने बयान में भरत गांधी ने बताया कि कन्नौज अपहरण कांड की पूरी साजिश पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा अपनी पत्नी को कन्नौज लोकसभा क्षेत्र से निर्विरोध सांसद बनाने के लिए द्वारा रची गई थी, क्योंकि फिरोजाबाद में राजबब्बर से हारने के बाद अखिलेश यादव फिर से कोई जोखिम नही लेना चाहते थे। वीपीआई प्रमुख ने बताया कि उनकी पार्टी के प्रभात पांडे,  सादेश यादव और राम सिंह लोधी का उस समय अपहरण कर लिया गया, जब प्रभात पाण्डे कन्नौज लोकसभा क्षेत्र उपचुनाव के लिए वीपीआई के प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल करने जा हे थे।

याचिकाकर्ता भरत गांधी ने बताया कि शहर की पुलिस अपहरणकर्ताओं की खुलेआम मदद कर रही थी। तत्कालीन जिलाधिकारी सिल्वा कुमारी जे. पूरे अपहरण कांड की संरक्षिका थीं और चुनाव आयोग के  बजाय अखिलेश यादव के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रही थीं। श्री गांधी ने सीबी सीआईडी को बताया है कि अपहरण करने के लिए सभी अपराधियों को सफेद कुर्ते-पायजामे और सफेद पैंट-शर्ट में लगाया गया था। शायद ऐसा इसलिए किया गया था कि उनको पहचानना मुश्किल हो। अपहरण के लिए ललकारने वाले लोग अलग थे, जो नामांकन करने वाले लोगों को दबोच कर उनके नामांकन पत्रों को फाड़ कर टुकड़े-टुकड़े कर देते थे और हवा में उड़ा दिया दिया करते थे। इसके बाद बारी आती थी स्थानीय पुलिस अधिकारियों और कोतवाल की, जो नामांकन करने वालों और उनके प्रस्तावकों को मारते-पीटते और धकियाते हुए कन्नौज कलेक्ट्रेट परिसर में खड़ी उन चमचमाती गाड़ियों में धकेल देते थे, जिन पर समाजवादी पार्टी का झण्डा लगा रहता था। गाड़ी में पहले से बैठे हुए अपराधी अपनी पिस्तौल अपहरण का शिकार लोगों की कनपटी पर लगाकर गाड़ी की सीट के नीचे दुबककर बैठ जाने के लिए विवश करते थे। इसके बाद अपहरण के शिकार लोगों की आंखों पर गमछा बांध दिया जाता था, जिससे वह किसी व्यक्ति को या किसी जगह को पहचान न सकें। फिर गाड़ी का ड्राइवर अपहरण के शिकार लोगों को किसी कोल्ड स्टोर में ले जाता था, जहां पर उनके आंखों पर बंधे गमछे को खोल दिया जाता था और पानी पिलाया जाता था। इसके बाद आंखों पर पट्टियां दोबारा बांधकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया जाता था, जहां सैकड़ों लोगों को अपहृत करके सप्ताह भर से रखा गया था। 06 जून 2012 को नामांकन पत्र भरने की अंतिम तिथि थी। उस दिन शाम को अपहरण के शिकार सभी लोगों को सुदूर जंगलों में ले जाकर छोड़ दिया गया। यद्यपि यह जांच का विषय है कि कुछ लोगों की हत्या की गयी, या नहीं।

राजनीतिक सुधार के लिए भरत गांधी का प्रस्ताव लगभग सभी पार्टियों के 137 सांसदों ने संसद में पेश किया था। राज्य सभा की स्टैंडिंग कमेटी ने सन 2011 में भरत गांधी की कुछ बातें लागू करने की सिफारिश भी की थी। इसके बावजूद भी जब कानून नहीं बना, तो श्री गांधी के देशव्यापी समर्थकों ने वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल का गठन किया। यह पार्टी राजनीति से अपराध दूर करने और राजनीती सुधार के एजेंडे पर कार्य कर रही है। इसलिए पार्टी ने अपहरण काण्ड के शिकार कुछ लोगों से सम्पर्क किया और संयुक्त रूप से कानूनी कार्यवाही करने की मांग की। किन्तु अपहरण के शिकार लोग अपहरण के दौरान दी गयी यातनाओं से इतने भयभीत थे कि किसी ने भी इस आपराधिक वारदात के विरुद्ध पुलिस या अदालत में आवाज उठाने की हिम्मत नहीं की। अन्त में यह कानूनी लड़ाई वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल को अकेले ही लड़नी पड़ी। यहां तक कि पार्टी के जिन लोगों को कानूनी कार्यवाही करने के लिए अधिकृत किया गया, अखिलेश यादव ने अपने हथियारबंद अपराधियों को उनके घरों पर भेजकर डराया और धमकाया और कानूनी कार्यवाही से हाथ खींच लेने के लिए विवश कर दिया। इसलिए कानूनी कार्यवाही का सारा जिम्मा भरत गांधी को खुद अपने हाथ में लेना पड़ा। इसीलिए श्री गांधी ने कन्नौज अपहरण कांड को लेकर 22 जनवरी 2013 को सुप्रीम कोर्ट में स्वयं बहस की और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में सारी कानूनी कार्यवाही स्वयं अपने नाम से की। हालांकि इसके लिए उनके ऊपर अखिलेश यादव ने 3 बार जानलेवा हमला कराया किन्तु संयोगवश तीनों बार वह सुरक्षित रहे। इन हमलों के बारे में भी सीबी सीआईडी जांच कर रही है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कन्नौज अपहरण कांड की जांच सीबीसीआईडी से कराने का आदेश पिछले साल 24 फरवरी 2016 को उ. प्र. सरकार को दिया था। किंतु अखिलेश यादव के दबाव में गृह सचिव देवाशीष पाण्डा ने आयोग के आदेश का पालन नहीं किया। यह जानकारी सीबीसीआईडी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को और याचिकाकर्ता भरत गांधी को 8 सितम्बर, 2016 के पत्र के माध्यम से उस समय दी, जब सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मांगी गई।

सीबीसीआईडी द्वारा दी गई जानकारी मिलने के बाद आयोग अगला आदेश जारी करने वाला था, किंतु तब तक प्रदेश में सरकार बदल गई। आदित्यनाथ योगी सरकार ने मानवाधिकार आयोग के आदेश के अनुपालन में गत 3 अप्रैल 2017 को शासनादेश जारी करके प्रदेश की सीबीसीआईडी को कन्नौज अपहरण कांड और भरत गांधी के ऊपर किए गए जानलेवा हमलों के मामले में जांच करने की अनुमति दे दी। इस जांच को कराने के लिए सीबीसीआईडी हेडक्वार्टर ने कानपुर के आईजी को अधिकृत किया है। आयोग के निर्देशानुसार भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा देने संबंधित कार्यवाही भी प्रदेश के गृह मंत्रालय द्वारा की जा रही है।

भवदीय

सादेश यादव

सचिव प्रदेश कार्य समिति, उ. प्र.

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल

अखिलेश के सामने जेल का संकट, योगी के सामने धर्म संकट

        राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नए आदेश ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जेल भेजने का रास्ता खोल दिया है। इसके साथ ही वर्तमान मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ के सामने यह धर्म संकट खड़ा हो गया है कि वह अखिलेश यादव को जेल भेजें या मुख्यमंत्री बिरादरी का सदस्य होने के नाते उन पर रहम करें। कन्नौज अपहरण काण्ड में फंसे अखिलेश यादव के मामले की श्री योगी सी. आई. डी. को निष्पक्ष जांच करने देते हैं, तो अखिलेश के लिये जेल से बचना मुश्किल हो जायेगा। यदि योगी जी सीआईडी के काम में पूर्व मुख्यमंत्रियों की तरह दखल देते हैं, तो अखिलेश को जेल जाने से बचा सकते हैं। मुख्यमंत्रियों की बिरादरी से होने के नाते अखिलेश के गुनाहों पर वर्तमान मुख्यमंत्री उसी तरह पर्दा डाल सकते हैं, जैसे मायावती ने मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के गुनाहों पर डाला और अखिलेश यादव ने मायावती के गुनाहों पर डाल कर जेल से बचाया था।

भाजपा व बसपा की अब तक नीति यही रही कि सपा के गुण्डे सुरक्षित रहें व जनता पर जुल्म ढ़ायें, जिससे हम जुल्म के खिलाफ वोट मांगे। हालांकि नये मुख्यमंत्री के निकट के लोग यह मानते हैं कि मुख्यमंत्री योगी जी उस मिट्टी के नहीं बने हैं, जिस मिट्टी से उनसे पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने प्रदेश से अपराध खत्म करने का बीड़ा उठाया है। उसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का यह आदेश मील का पत्थर साबित होगा, जिसमें अखिलेश यादव और उनके लगभग 800 लोगों का आपराधिक गिरोह जेल जा सकता है। आरोप है कि इन सभी 800 लोगों को श्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री रहते हुए अपहरण के काम पर लगा रखा था और इन सभी ने कन्नौज में दिनदहाड़े 100 से ज्यादा लोगों का अपहरण करके मुख्यमंत्री की पत्नी को निर्विरोध सांसद बनाया था। सभी तो चुप बैठ गये लेकिन वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के कार्यकर्ताओं का अपहरण अखिलेश यादव को मंहगा पड़ा। अपहरण के आरोपियों में अखिलेश यादव के अलावा मुख्यमंत्री रहते हुये उनके पीआरओ, उनके सांसद प्रतिनिधि और उनके कई मंत्री भी शामिल हैं।

वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल (वीपीआई) के मुखिया श्री भरत गांधी द्वारा सन् 2013 में की गई शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केस नंबर 40582/24/48/2013 दर्ज किया था। आयोग ने 2 मार्च, 2015 के अपने आदेश से प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से मामले में जांच करने को कहा था। किन्तु शिकायतकर्ता के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा लगाये गये अपराधियों और पुलिस महानिदेशक कार्यालय के कुछ अधिकारियों ने श्री गांधी की केस के मुख्य गवाह अमेठी के अधिवक्ता श्री प्रभात पाण्डेय का उनके घर से दूसरी बार अपहरण कर बंदूक की नोक पर मनमाफिक बयान लिखवा लिया और तत्कालीन मंत्री श्री गायत्री प्रजापति के माध्यम से वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के उक्त प्रभात पाण्डेय को जबरदस्ती समाजवादी पार्टी का पदाधिकारी बना दिया गया। अमेठी के थाने में 9 जुलाई, 2015 को श्री पाण्डेय पर बलात्कार का झूठा मुकदमा लिखवा दिया गया। किन्तु संयोगवश फोन पर की गई प्रभात पाण्डेय की बातचीत रिकार्ड हो गई और वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के मुखिया श्री भरत गांधी ने ऑडियो फाइल सुनने के लिये आयोग को भेज दिया। इसके बाद आयोग ने गत 24 फरवरी 2016 को दूसरा आदेश देते हुये श्री भरत गांधी के जीवन पर समाजवादी पार्टी के गुण्डों से खतरा महसूस किया और प्रमुख सचिव गृह श्री देवाशीष पाण्डा को आदेश देते हुये कहा कि शिकायतकर्ता श्री भरत गांधी को और लखनऊ में रह रहे उनके परिवारजन को पुलिस सुरक्षा दिया जाये साथ ही साथ अब मामले की जांच सी. आई. डी. से कराके आयोग को 6 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाये। शिकार्यतकर्ता ने आयोग को यह भी बताया है कि इस बीच शिकार्यतकर्ता यानी वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल (वीपीआई) के मुखिया श्री भरत गांधी पर तीन बार जानलेवा हमला करवाया गया और एक बार भी लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार थाने में मुकदमा नही लिखने दिया गया।

अपने आवेदनों के माध्यम से श्री भरत गांधी ने आयोग को बताया कि प्रदेश सरकार ने आयोग के आदेश का उसी तरह उल्लंघन कर दिया है जिस तरह सरकार ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन सन् 2013 में किया था। श्री भरत गांधी की बातों को सही बताते हुये सी. आई. डी. उत्तर प्रदेश ने आयोग को भेजे गए अपने 9 सितम्बर, 2016 के पत्र में कहा है कि माननीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जांच करने संबंधी आदेश सी. आई. डी. को प्राप्त हुए हैं और प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह से जांच करने की अनुमति चार बार मांगी गई किंतु जांच की अनुमति सरकार ने नहीं दी। श्री भरत गांधी और सी. आई. डी. उत्तर प्रदेश के पत्रों पर संज्ञान लेते हुये माननीय आयोग ने अपने नए आदेश दिनांक- 30 मार्च, 2017 में प्रदेश के प्रमुख गृह सचिव श्री देवाशीष पांडा को सम्मन भेजा है। अब गृह सचिव को श्री भरत गांधी के केस में पारित गत आदेश 24 फरवरी 2016 का अनुपालन करने के तहत श्री भरत गांधी को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराना होगा। सी. आई. डी. को जांच करने की अनुमति देनी होगी और जांच की रिपोर्ट 6 सप्ताह के भीतर आयोग को भेजनी होगी। यदि गृह सचिव फिर से अखिलेश यादव और उनके आपराधिक गिरोह को बचाने की कोशिश करते हैं और आयोग के आदेश का अनुपालन करने में हीलाहवाली करते हैं तो आयोग की प्रक्रिया के तहत आयोग अपने अगले आदेश में प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को गिरफ्तार करके आयोग के समक्ष पेश करने के लिए वारंट जारी करेगा। किन्तु वारंट की नौबत आती हुई नही दिख रही है क्योंकि अब प्रदेश में सरकार बदल चुकी है। नये मुख्यमंत्री प्रदेश में अपराधियों की सफाई का अभियान चला रहे हैं। वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल (वीपीआई) के मुखिया श्री भरत गांधी के केस में पारित माननीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का आदेश मुख्यमंत्री के अपराध निवारण के काम में सहयोगी ही साबित होगा, क्योंकि इससे समाजवादी पार्टी के प्रदेश भर के लगभग 800 अपराधियों के पकडे़ जाने की संभावना है।

श्री अखिलेश यादव पर यह मुकदमा जाने-माने राजनीति सुधारक व दर्जनों पुस्तकों के लेखक व वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के मुखिया श्री भरत गांधी ने राजनीति से अपराध खत्म करने की अपनी मुहिम के तहत दायर किया है। इसके पहले उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी मुकदमा किया है। वे सुप्रीम कोर्ट में इसी मामले में दो बार बहस भी कर चुके हैं।

वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल, उत्तर प्रदेश !

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके लगभग 800 पालतू आपराधियों के अपराधों की जांच करने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 24 फरवरी 2016 को आदेश दिया था। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के दबाव में पूरे 1 साल से उत्तर प्रदेश के गृह सचिव देवाशीष पांडा ने फाइल दबा के रखे हुई थी। जैसे ही योगी सरकार बनी,  वैसे ही आयोग के आदेश का अनुपालन शुरू हो गया। मामले में याचिकाकर्ता व वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के प्रमुख श्री भरत गांधी को प्रदेश के गृह सचिव ने पत्र भेजकर यह जानकारी दिया है कि कन्नौज अपहरण कांड के प्रकरण में और आपके ऊपर कराए गए हमलों के प्रकरण में सीबी सीआईडी से जांच कराने के लिए शासनादेश जारी किया गया है और आप की सुरक्षा के लिए गृह विभाग के सेक्शन 2 को आदेशित कर दिया गया है।  समाजवादी रास्ते पर चलने वाली वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल  का जनाधार न बढ़ने पाए, इसके लिए पूरे 5 साल तक अखिलेश यादव ने पार्टी के पदाधिकारियों के खिलाफ संगीन आपराधिक साजिश रची, लोगों का अपहरण करवाया, गायत्री प्रजापति के सहारे गैंगरेप के झूठे मुकदमे दायर करवाए, श्री भरत गांधी पर जानलेवा हमले कराया। लेकिन उनके जुल्म की शिकार पार्टी ने भी हार नहीं मानी और उनके हर जुर्म पर वीपीआई ने अखिलेश यादव पर कानूनी शिकंजा कसना जारी रखा।  अपने कार्यकाल के पुलिस महानिदेशकों और गृह सचिव का दुरुपयोग करके अखिलेश यादव ने किसी भी अदालती आदेश को 5 साल तक लागू नहीं होने दिया।  योगी सरकार आते ही गृह मंत्रालय में  धूल खा रहे इन आदेशों का अनुपालन शुरू हो गया है। अभी देखना है के गृह सचिव देवाशीष पांडा को, अखिलेश के जंगल राज के अवकाश प्राप्त पुलिस महानिदेशकों को, स्वयं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को और कन्नौज लखनऊ, अमेठी व कानपुर देहात के पुलिस अधीक्षकों को CID बचाती है, या जेल भेजती है। यह देखना होगा कि हम मामला सीआईडी के स्तर पर निपटता है, या सीबीआई के स्तर तक जाता है। सीबीआई ने श्री भरत गांधी को पत्र भेजकर संवैधानिक अदालत के आदेशों की मांग की है। प्रभावशाली अपराधियों को अगर सीआईडी ने बचाने का प्रयास किया और गृह सचिव ने उचित पुलिस सुरक्षा मंजूर न किया तो यह मामला हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा ही। देखिए उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव का पत्र। 24 फरवरी, 2016 के आदेश द्वारा आयोग ने कन्नौज अपहरण काण्ड की और याचिकाकर्ता भरत गांधी व उनके गवाहों पर हमले की घटनाओं की जांच सी. आई. डी. से कराने और श्री गांधी को पुलिस सुरक्षा मंजूर करने का आदेश दिया था। इन आपराधिक वारदातों में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव स्वयं और पूरे प्रदेश के उनके आपराधिक साथी 800 लोग आरोपी है। मुख्यमंत्री स्वयं आरोपी होने के कारण गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक ने आयोग के आदेश का अनुपालन करने से मना कर दिया।  अपनी पत्नी डिम्पल यादव को निर्विरोध सांसद बनाने के लिये किये गये कन्नौज अपहरण काण्ड में फंसे अखिलेश यादव के मामले  सी. आई. डी. को निष्पक्ष जांच होती है तो अखिलेश के लिये जेल से बच पाना मुश्किल हो जायेगा। यद्यपि मुख्यमंत्रियों के बिरादरी से होने के नाते अखिलेश के गुनाहों पर वर्तमान मुख्यमंत्री उसी तरह पर्दा डाल सकते हैं, जैसे  मायावती ने मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के गुनाहों पर डाला और अखिलेश यादव ने मायावती के गुनाहों पर डाल डाल कर जेल से बचाया था।हालांकि राजनीति के जानकार यह मानते हैं कि मुख्यमंत्री योगी उस मिट्टी के नहीं बने हैं जिस मिट्टी से उनसे पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने प्रदेश से अपराध खत्म करने का बीड़ा उठाया है। उसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का यह आदेश मील का पत्थर साबित होगा, जिसमें अखिलेश यादव और उनके लगभग 800 आपराधियों का गिरोह जेल जा सकता है। आरोप है कि इन सभी 800 लोगों को अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री रहते हुए अपहरण के काम पर लगा रखा था और इन सभी ने कन्नौज में दिनदहाड़े 100 से ज्यादा लोगों का अपहरण करके मुख्यमंत्री की पत्नी को निर्विरोध सांसद बनाया था। अपहरण के आरोपियों में अखिलेश यादव के अलावा मुख्यमंत्री रहते हुये उनके पीआरओ, उनके सांसद प्रतिनिधि और उनके कई मंत्री भी शामिल थे।वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल (वीपीआई) के मुखिया भरत गांधी द्वारा 11 नवम्बर, सन् 2013 में की गई शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केस नंबर 40582/24/48/2013 दर्ज किया था। इस मामले में आयोग ने 2 मार्च, 2015 के अपने आदेश से प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से मामले में जांच करने को कहा था। किन्तु शिकायतकर्ता के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा लगाये गये अपराधियों और पुलिस महानिदेशक कार्यालय के कुछ अधिकारियों ने श्री गांधी के केस के मुख्य गवाह अमेठी के अधिवक्ता प्रभात पाण्डेय का उनके घर से दूसरी बार अपहरण कर बंदूक की नोक पर मनमाफिक बयान लिखवा लिया और तत्कालीन मंत्री गायत्री प्रजापति के माध्यम से वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के प्रत्यासी श्री पाण्डेय को जबरदस्ती समाजवादी पार्टी का पदाधिकारी बना दिया गया। मुंह बंद रखने के लिये अमेठी के थाने में 9 जुलाई, 2015 को श्री पाण्डेय पर बलात्कार का झूठा मुकदमा लिखवा दिया। किन्तु संयोगवश फोन पर की गई प्रभात पाण्डेय की बातचीत रिकार्ड हो गई और वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल के मुखिया श्री  गांधी ने ऑडियो फाइल सुनने के लिये आयोग को भेज दिया। इसके बाद आयोग ने गत 24 फरवरी 2016 को दूसरा आदेश देते हुये भरत गांधी के जीवन पर समाजवादी पार्टी के गुण्डों से खतरा महसूस किया और प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पाण्डा को आदेश देते हुये कहा कि शिकायतकर्ता श्री गांधी को और लखनऊ में रह रहे उनके परिवारजन को पुलिस सुरक्षा दिया जाये, साथ ही साथ अब मामले की जांच सी. बी. सी. आई. डी. से कराकर आयोग को 6 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपा जाये। शिकार्यतकर्ता ने आयोग को यह भी बताया है कि इस बीच शिकार्यतकर्ता यानी वोटर्स पार्टी इण्टरनेशनल (वीपीआई) के मुखिया श्री भरत गांधी पर तीन बार जानलेवा हमला करवाया गया और एक बार भी लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार थाने में मुकदमा नही लिखने दिया गया।अपने आवेदनों के माध्यम से श्री भरत गांधी ने आयोग को बताया कि प्रदेश सरकार ने आयोग के आदेश का उसी तरह उल्लंघन कर दिया है जिस तरह सरकार ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन सन् 2013 में किया था। श्री भरत गांधी की बातों को सही साबित करते हुये सी. आई. डी. उत्तर प्रदेश ने आयोग को भेजे गए अपने 9 सितम्बर, 2016 के पत्र में कहा है कि माननीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जांच करने संबंधी आदेश सी. आई. डी. को प्राप्त हुए हैं और प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह से जांच करने की अनुमति चार बार मांगी गई किंतु जांच की अनुमति सरकार ने नहीं दी।  इसके पहले श्री गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी मुकदमा किया है, वह सुप्रीम कोर्ट में इसी मामले में दो बार बहस भी कर चुके हैं।